Search ई-पेपर ई-पेपर WhatsApp

किसानों के अनुभव

बांस से बन रही खूबसूरत रेशमी साड़ी, 10 साल तक नहीं होती खराब

इंदौर। एक वक्त था जब रेशम का धागा रेशम के कीड़े को मारकर प्राप्त किया जाता था। इसलिए कई लोग रेशमी वस्त्र नहीं पहनते ...

पौधारोपण पर डेढ़ हजार करोड़ और रखरखाव पर 90 करोड़ खर्च, फिर भी जंगल वीरान 

एक साल में 350 करोड़ खर्च प्रदेश में हर साल पौधों की खरीद और रख-रखाव पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। 2021-22 ...

पन्ना जिले में चारा-भूसा के निर्यात पर प्रतिबंध

पन्ना। देश में सूखे चारे का संकट बढ़ रहा है। इसका असर यह पड़ रहा है कि अब एक जिले से दूसरे जिले में ...

घर बैठे करें दाल में मिलावट की पहचान, वैज्ञानिकों ने बताया खास तरीका

नई दिल्ली, बाजार में खाद्य संबंधी चीजें खरीदते समय, लोगों के मन में उसकी गुणवत्‍त्‍ता को लेकर कई तरह के सवाल आते हैं। ऐसा ...

खरगोन के किसानों ने 500 हेक्टेयर में की खास किस्म की मूंगफली की बुआई, होगी बंपर कमाई

sanjay sharmaखरगोन, मौसम में खाली रहने वाले खरगोन के खेतों में किसानों ने गुजरात, बेंगलुरु जैसे राज्यों में पैदा होने वाली मूंगफली की नई ...

किसानों ने व्यावसायिक खेती की ओर बढ़ाया कदम, फ्रोजेन मटर का अपना ब्रांड लाने की तैयारी

anand sharan आरा। बिहार के भोजपुर में किसानों ने सामूहिक एकता की मिसाल पेश की है। गत दो वर्ष से फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी बनाकर ...

फसल उत्पादन में वृद्धि के लिए बडे काम का है कच्चा कोयला, जानिए बनाने और उपयोग की ​विधि 

बायोचार बनाने व प्रयोग करने की यह तकनीक लगभग 2,000 साल पुरानी है। इसके द्वारा कृषि अपशिष्ट पदार्थों को मृदा सुधारक के रूप में बदल दिया जाता है, जो कि कार्बन को मृदा में पकड़े रखता है। यह खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देता है और मृदा की जैव विविधता में वृद्धि करता है। इस तकनीक द्वारा वनों की कटाई पर भी रोक लगती है।

किसानों का मित्र केंचुआ और किसानों का हमसफ़र केंचुआ खाद

लेखक1. घनश्याम बामनिया, सहायक प्राध्यापक   विभाग.  पादप प्रजनन एवं अनुवांशिकी, स्कूल आफ एग्रीकल्चर, सीहोर, मप्र 2 डॉ. धनेश कुमार रैदास, सहायक प्राध्यापक पादप कार्यकी विभाग, सीहोर, आरए ...

कृषकों ने सीखी दूधिया मशरूम उत्पादन तकनीक

ग्वालियर, कृषि विज्ञान केन्द्र, ग्वालियर द्वारा मशरूम उत्पादन तकनीक पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया । प्रशिक्षण में उदयपुर, अजयपुर, गिरवाई, तिघरा, ...

गेहूं की तीन नई किस्में, जो बढ़ते तापमान में भी देंगी बंपर पैदावार

आईसीएआर द्वारा गेहूं की तीन नई किस्में विकसित की गई हैं, जिनपर बढ़ते तापमान का ज्यादा असर नहीं होगा और अच्छा उत्पादन देंगी।