इन दिनों किसानों के सामने एक गंभीर समस्या उभर रही है- आम का मालफॉर्मेशन रोग। यह बीमारी पौधों की बढ़वार और फलन दोनों को प्रभावित करती है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. एसके सिंह ने आम को इस रोग बचाने के उपाय बताए हैं।
जानिए क्या है वानस्पतिक मालफॉर्मेशन
वानस्पतिक मालफॉर्मेशन मुख्य रूप से नई बढ़वार को प्रभावित करता है। पौधे की सामान्य शाखाएं विकसित नहीं हो पातीं। पत्तियां असामान्य रूप से गुच्छों में निकलती हैं। किसान इसे आम भाषा में “झाड़ी बनना” या “झुंडदार पत्तियां” कहते हैं। इससे पौधे की वृद्धि रुक जाती है और आगे चलकर फल उत्पादन भी प्रभावित होता है।
मालफॉर्मेशन के प्रमुख लक्षण
छोटी-छोटी पत्तियों के गुच्छे बनना, झाड़ी जैसी संरचना विकसित होना,नवजात पौधों में अधिक प्रकोप,पौधे की बढ़वार रुक जाना, फलन पर अप्रत्यक्ष असर,
मालफॉर्मेशन रोग के कारण
वैज्ञानिकों के अनुसार यह रोग एकल कारण से नहीं, बल्कि कई कारकों के संयुक्त प्रभाव से फैलता है—
फफूंद Fusarium mangiferae
हार्मोन असंतुलन
कली माइट (Bud mite) Aceria mangiferae
संक्रमित रोपण सामग्री का उपयोग
किन परिस्थितियों में बढ़ता है रोग?
तापमान: 24–28°C (लगभग 26°C सर्वोत्तम)
सापेक्षिक आर्द्रता: 65% या अधिक
घनी छाया और खराब वायु संचार
अधिक नाइट्रोजन उर्वरक का प्रयोग
पौधों की तीव्र वृद्धि अवस्था
कैसे करें एकीकृत प्रबंधन (IDM)?
विशेषज्ञों के अनुसार एकीकृत प्रबंधन (IDM) अपनाना सबसे प्रभावी उपाय है।
बचाव के मुख्य उपाय
संक्रमित टहनियों की समय पर छंटाई
रोगमुक्त पौध सामग्री का चयन
आवश्यकतानुसार रासायनिक नियंत्रण
प्लैनोफिक्स का नियंत्रित उपयोग
कोबाल्ट सल्फेट का छिड़काव
जैविक नियंत्रण उपाय अपनाना
संतुलित पोषण प्रबंधन
बाग की नियमित सफाई और निगरानी
विशेषज्ञ की सलाह
वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि किसान रोगमुक्त रोपण सामग्री का उपयोग करें और नियमित मॉनिटरिंग रखें तो संक्रमण को 60–70% तक कम किया जा सकता है। समय रहते पहचान और प्रबंधन ही आम की अच्छी पैदावार की कुंजी है।




