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सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता बेहद कम बन रही कृषि उत्पादन में कमी का कारण : डॉ. बिस्वास

21 दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण के 20 वें दिन हुए महत्वपूर्ण व्याख्यान

anjali chourasiya
जबलपुर।
जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (जेएनके विवि), द्वारा आयोजित 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण के 20वें दिन ‘सतत् खेती में मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए उभरती प्रौद्योगिकियां और नवाचार’ विषय पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया गया। मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायनशास्त्र विभाग के एडवांस्ड फैकल्टी ट्रेनिंग सेंटर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर), नई दिल्ली के प्रख्यात मृदा वैज्ञानिक डॉ. डीआर बिस्वास, एमेरिटस साइंटिस्ट ने सतत् खेती में मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए नवीन उर्वरक फामूर्लेशन पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम में मृदा उर्वरता, भूमि क्षरण और पोषक तत्वों के उपयोग दक्षता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करते हुए जानकारी दी पोटाश, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, और सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता बेहद कम है, जो कृषि उत्पादन में कमी का कारण बन रहा है। उन्होंने समाधान के रूप में रॉक फॉस्फेट समृद्ध प्रस्मड कम्पोस्ट, धीमी गति से घुलने वाले उर्वरक, और नियंत्रित विमोचन उर्वरकों के उपयोग की सिफारिश की। इसके अलावा, मृदा और जुताई अनुसंधान और अवशिष्ट फॉस्फोरस के प्रबंधन पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता बताई। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. बीके दीक्षित, डॉ. बीएस द्विवेदी, डॉ. जीएस टैगोर, डॉ. अमित उपाध्याय, डॉ. आरके साहू, डॉ. एफसी अमूले, डॉ. अभिषेक शर्मा सहित कई अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।

सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता बेहद कम बन रही कृषि उत्पादन में कमी का कारण : डॉ. बिस्वास

21 दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण के 20 वें दिन हुए महत्वपूर्ण व्याख्यान

anjali chourasiya
जबलपुर।
जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (जेएनके विवि), द्वारा आयोजित 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण के 20वें दिन ‘सतत् खेती में मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए उभरती प्रौद्योगिकियां और नवाचार’ विषय पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया गया। मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायनशास्त्र विभाग के एडवांस्ड फैकल्टी ट्रेनिंग सेंटर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर), नई दिल्ली के प्रख्यात मृदा वैज्ञानिक डॉ. डीआर बिस्वास, एमेरिटस साइंटिस्ट ने सतत् खेती में मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए नवीन उर्वरक फामूर्लेशन पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम में मृदा उर्वरता, भूमि क्षरण और पोषक तत्वों के उपयोग दक्षता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करते हुए जानकारी दी पोटाश, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, और सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता बेहद कम है, जो कृषि उत्पादन में कमी का कारण बन रहा है। उन्होंने समाधान के रूप में रॉक फॉस्फेट समृद्ध प्रस्मड कम्पोस्ट, धीमी गति से घुलने वाले उर्वरक, और नियंत्रित विमोचन उर्वरकों के उपयोग की सिफारिश की। इसके अलावा, मृदा और जुताई अनुसंधान और अवशिष्ट फॉस्फोरस के प्रबंधन पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता बताई। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. बीके दीक्षित, डॉ. बीएस द्विवेदी, डॉ. जीएस टैगोर, डॉ. अमित उपाध्याय, डॉ. आरके साहू, डॉ. एफसी अमूले, डॉ. अभिषेक शर्मा सहित कई अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।

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