ISVS-2025 में देश भर के विशेषज्ञ हुए सम्मानित
anjali chourasiya
जबलपुर। भारतीय पशु चिकित्सा शल्य चिकित्सा सोसायटी (ISVS) का 48 वां अधिवेशन एवं राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस ISVS-2025 का भव्य शुभारंभ नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस यूनिवर्सिटी के अंतर्गत संचालित वेटरनरी कॉलेज के सभागार में गुरुवार को हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वेटरनरी कौंसिल ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष डॉक्टर उमेश चंद्र शर्मा रहे । कार्यक्रम के अध्यक्षता वेटरिनरी यूनिवर्सिटी के कुलगुरु प्रोफेसर मनदीप शर्मा ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथि डॉक्टर यू सी शर्मा , माननीय कुलपति प्रोफेसर मनदीप शर्मा जी , इंडियन सोसाइटी ऑफ़ वेटरनरी सर्जरी के अध्यक्ष डॉक्टर रमेश, सोसाइटी के सेक्रेटरी डॉक्टर डी बी पाटिल तथा सोसाइटी के संस्थापक सदस्य डॉ पी कुलकर्णी, अधिष्ठाता वेटरनरी कॉलेज डॉक्टर आरके शर्मा एवं ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री डॉक्टर अपरा शाही द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के उपरांत किया गया तत्पश्चात मंचासीन अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ ,शाल,श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह देकर किया गया। कार्यक्रम को मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित करते हुए डॉक्टर उमेश चंद्र शर्मा ने पशु चिकित्सा शिक्षा के भविष्य और इसके नियामक ढांचे को लेकर अपने विचार रखते हुए वेटरनरी सेक्टर देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसमें सबसे ज्यादा बड़ी भूमिका हमारे वेटरिनेरियंस की है जो लगातार नई तकनीक और अनुसंधान के साथ इस बात को लेकर प्रयास करते हैं की जो काम किया जा रहा है सरकार की योजनाएं हैं उन्हें अधिक से अधिक पशुपालकों और किसानों तक कैसे पहुंचा जाए यह बड़ी गर्व की बात है कि इतनी बड़ी कॉन्फ्रेंस का आयोजन प्रदेश में हो रहा है और निश्चित ही समापन पर देश के विकास में वेटरनरी का योगदान कैसे बड़े इसके लिए नए आयाम होंगे।
इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के लागू होने के समय पशु चिकित्सा शिक्षा के अस्तित्व को लेकर एक बड़ी चुनौती सामने आई थी। शुरुआती दौर में वेटनरी शिक्षा को मेडिकल और लॉ जैसे प्रोफेशनल कोर्सेज से अलग कर ‘सामान्य शिक्षा’ की श्रेणी में रखने का प्रस्ताव था। VCI के प्रयासों से मिली मेडिकल के समान मान्यता
वक्ता ने साझा किया कि यदि वेटरनरी शिक्षा को सामान्य श्रेणी में डाल दिया जाता, तो इसकी गुणवत्ता और नियंत्रण प्रभावित होने का खतरा था। उन्होंने बताया कि वेटरनरी काउंसिल ऑफ इंडिया ने सरकार के समक्ष पुरजोर तरीके से यह पक्ष रखा कि पशु चिकित्सा एक विशुद्ध वैज्ञानिक और प्रैक्टिस-आधारित विषय है। परिषद के निरंतर प्रयासों के चलते भारत सरकार के उच्च शिक्षा मंत्रालय ने इस मांग को स्वीकार किया। अब वेटरनरी शिक्षा को चिकित्सा शिक्षा (Medical Education) के समकक्ष स्थान दिया गया है, जो इस क्षेत्र के वैज्ञानिकों और छात्रों के लिए एक ऐतिहासिक जीत है।
उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में ‘एम्स’ (AIIMS) की तर्ज पर पशु चिकित्सा के लिए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ वैटरनरी साइंस (AIIVS) की स्थापना की जाने की बात और जोर देते हुए कहा कि इसे लेकर सरकार के प्रयास बहुत तेजी से चल रहे हैं इस तरह के आधुनिक बड़े संस्थान बनने से निश्चित ही पीड़ित पशुओं को बेहतर उपचार मिल सकेगा।
नए पीजी डिप्लोमा कोर्सेज की शुरुआत
पशु चिकित्सकों के कौशल विकास (Up-skilling) के लिए विश्वविद्यालय जल्द ही नए पीजी रेगुलेशन और शॉर्ट टर्म डिप्लोमा कोर्सेज शुरू करने जा रहा है। ये कोर्स मेडिकल क्षेत्र के ऑर्थोपेडिक सर्जरी जैसे विशेष क्षेत्रों की तर्ज पर आधारित होंगे, जिससे विशेषज्ञता बढ़ेगी।
पशु चिकित्सकों को समाज के प्रति अपने ऋण को पहचानना होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (NDVSU) के कुलपति प्रोफेसर डॉ. मनदीप शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि देश में बहुत ही कम सौभाग्यशाली छात्रों को स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी जैसे उच्च स्तर की पशु चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस शिक्षा का उपयोग समाज और बेजुबान पशुओं की सेवा में होना चाहिए। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे आत्म-मंथन करें कि उन्होंने समाज से जो प्राप्त किया है, उसके बदले वे समाज को क्या दे रहे हैं।
ज्ञान के मंथन की भारतीय परंपरा
भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए कुलपति ने बताया कि भारत प्राचीन काल से ही वैचारिक संवाद और ‘सिम्पोजियम’ (Symposium) की भूमि रहा है। उन्होंने नैमिषारण्य में होने वाले ऋषियों के संगम और समुद्र मंथन के उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह मंथन से अमृत निकलता है, उसी तरह ऐसे सम्मेलनों के वैचारिक मंथन से पशु चिकित्सा के क्षेत्र में नई दिशाएं निकलेंगी।
डॉ. शर्मा ने अपने पुराने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कैसे बीते वर्षों में पशु चिकित्सा पद्धति बदली है। उन्होंने कहा कि पहले निदान (Diagnosis) के संसाधन सीमित थे, लेकिन आज शल्य चिकित्सा (Surgery) और रेडियोलॉजी के क्षेत्र में अत्यधिक प्रगति हुई है। उन्होंने विशेषज्ञों से आग्रह किया कि वे पशु रोगों के सटीक और त्वरित निदान के लिए आधुनिकतम तकनीकों को अपनाएं।
क्षेत्र की चुनौतियां और भविष्य
कुलपति ने वेटरनरी पेशे के समक्ष आने वाली प्रशासनिक और सामाजिक चुनौतियों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सा क्षेत्र के योगदान को समाज में और अधिक पहचान दिलाने की आवश्यकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसे तकनीकी सत्रों के माध्यम से विशेषज्ञ अपने कौशल को निखारेंगे, जिसका सीधा लाभ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालकों को मिलेगा।
अधिष्ठाता डॉ आरके शर्मा ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया।
आयोजन सचिव डॉ अपरा शाही ने सम्मेलन की जानकारी साझा की। प्रेसिडेंट आई एस वी एस ने सोसाइटी के कार्यों को साझा किया। इस सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से करीब 500 प्रतिभागी जिसमें स्कॉलर्स, प्राध्यापक , शिक्षाविद भाग ले रहे हैं।।सोसाइटी के सेक्रेटरी डी बी पाटील तथा जॉइंट सेक्रेटरी डॉ आदर्श कुमार ने सोसाइटी द्वारा प्रदत्त पुरस्कारों के बारे में बताया। मंचासीन अतिथियों द्वारा कॉन्फ्रेंस के कंपेन्डियम का विमोचन किया तथा विभिन्न पुरस्कार, सम्मान वितरित की है जिसमें
प्रमुख सम्मान और विभूतियां
इस वर्ष ISVS फेलीसिटेशन-2025 के लिए डॉ. एम.आर. पटेल और डॉ. पी.ई. कुलकर्णी के नामों की घोषणा की गई है। उन्हें पशु चिकित्सा सर्जरी और रेडियोलॉजी के क्षेत्र में उनकी बहुमूल्य सेवाओं और समर्पण के लिए यह सम्मान अतिथियों द्वारा प्रदान किया गया इसी क्रम में डॉ. विजय परिहार को प्रतिष्ठित डॉ. ओ. रामकृष्ण ओरेशन अवार्ड-2025 से नवाजा ज गया। इसके अलावा, डॉ. एम.के. भार्गव को रुमिनेंट सर्जरी (जुगाली करने वाले पशुओं की सर्जरी) में उत्कृष्टता के लिए डॉ. जे.एम. निगम लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया गया।
भूतपूर्व अधिष्ठाता व भूतपूर्व कुलपति मथुरा वेटरिनरी यूनिवर्सिटी डॉ एपी सिंह को ,डॉ एमके भार्गव को तथा डॉक्टर वीपी चंनपुरिया को सम्मानित किया।
वर्ष 2024 के सत्र पुरस्कारों की घोषणा
कार्यक्रम के दौरान वर्ष 2024 में विभिन्न पशु चिकित्सा विधाओं में किए गए शोध और सफल सर्जरी के लिए भी पुरस्कार दिए गए जिनमें
आधुनिक तकनीक और निदान की आवश्यकता
- रुमिनेंट सर्जरी (Ruminant Surgery): सुपरपल्स्ड CO_2 लेजर द्वारा मवेशियों के ट्यूमर के उपचार पर शोध के लिए डॉ. जे.आर. सोलंकी और उनकी टीम को सम्मानित किया गया।
- लघु पशु शल्य चिकित्सा (Small Animal Surgery): कुत्तों में कान की सर्जरी और ऑटोलॉजिकल मूल्यांकन पर शोध के लिए रेणु मोटवानी, रक्षा और उनकी टीमों को चुना गया है।
- अश्व शल्य चिकित्सा (Equine Surgery): घोड़ों में कोलिक (पेट दर्द) और पैरों की सर्जरी पर विशेष शोध के लिए जसमीत सिंह खोसा और साथियों को पुरस्कार प्रदान किया गया
- वाइल्ड और चिड़ियाघर पशु (Wild and Zoo Animals): हाथी के बच्चे के पैर के उपचार के लिए स्वदेशी स्प्लिंट (Splint) बनाने और तेंदुए के शावक में ‘हाइटल हर्निया’ के निदान जैसे चुनौतीपूर्ण कार्यों के लिए विश्वादीप जेना और वी.एम. आनंद की टीमों को पुरस्कृत किया गया।
- विशिष्ट श्रेणी पुरस्कार: डॉ. एन. गुरुनाथन को ‘यंग सर्जन अवार्ड’ और डॉ. बृहस्पति भारती को ‘एम.आर. पटेल बेस्ट फील्ड वेटेरिनरियन अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।
इन क्षेत्रों में भी हुआ उत्कृष्ट कार्य
समारोह में रेडियोलॉजी, नेत्र विज्ञान (Ophthalmology), एनेस्थिसियोलॉजी, ऑर्थोपेडिक सर्जरी और एवियन (पक्षी) सर्जरी के क्षेत्र में भी शोध पत्रों और पोस्टर प्रस्तुतियों के लिए स्वर्ण पदक और प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। इसमें मुख्य रूप से कुत्तों में मोतियाबिंद, मवेशियों में हड्डी का फ्रैक्चर और बत्तखों की सर्जरी जैसे विषयों को शामिल किया गया है। कार्यक्रम में भूतपूर्व अधिष्ठाता एवं कुलपति मथुरा वेटरिनरी यूनिवर्सिटी डॉ एपी सिंह,डॉ जीत सिंह की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय कुल सचिव डॉक्टर एस एस तोमर, डॉ मधु स्वामी, डॉक्टर लखानी , डॉ शोभा जावरे,डॉक्टर घोष डीआर लखनी डॉ कारमोरे , डॉ मोहन सिंह, डॉ दास, डॉ राखी वैश्य डॉ देवेंद्र गुप्ता, डॉ बबिता दास, डॉ सोना दुबे, डॉ रामकिंकर मिश्रा, डॉ अपूर्वा मिश्रा तथा सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक गण आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ बबिता दास, डॉ रणधीर सिंह, डॉ अपूर्व मिश्रा तथा आयोजन हेतु गठित विभिन्न समिति के अध्यक्ष एवं सभी सदस्यों का योगदान रहा। मंच संचालन डॉ पायल जैन एवं आभार ज्ञापन डॉ रणधीर सिंह द्वारा किया गया।




