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पपीते की खेती में नई क्रांति ला सकती है रेड ग्लो वैरायटी, घर बैठे NSC से मंगाएं आनलाइन बीज

हाइब्रिड वैरायटी पपीते की खेती में नई क्रांति ला सकती है

भोपाल। कोरोना काल के बाद से किसानों का रुझान पारंपरिक खेती से हटकर नगदी फसल की ओर बढा है। ऐसे में किसानों के लिए पपीते की खेती एक अच्छा विकल्प हो सकती है। किसी भी खेती में सफलता के लिए बीज का चयन सबसे पहला चरण होता है।
किसानों के लिए नेशनल सीड्स कारपोरेशन की रेड ग्लो वैरायटी फायदेमंद साबित हो सकती है। रेड ग्लो हाइब्रिड वैरायटी बेहतर स्वाद, लंबी शेल्फ लाइफ और अधिक उपज के लिए जानी जाती है। नेशनल सीड्स कारपोरेशन के ऑनलाइन स्टोर से आप घर बैठे पपीते के बीज खरीद सकते हैं।

60 दिन बाद मिलने लगता है फल

रेड ग्लो वैरायटी लगाने के 60 दिन बाद से ही फलन देना शुरू कर देगी और एक पौधा 50 से 60 केजी तक का फलन 3 बार देगा, जिससे आप एक बार मै 1 कट्ठा खेत में 75 हजार रूपए कमा सकते हैं।

बीमारियों और कीटों के प्रति प्रतिरोधक

इस वैरायटी के पौधे में एक फल 3 से 4 केजी के होता है। फल काफी मीठा और स्वादिष्ट भी होता है। यह वैरायटी कई तरह की बीमारियों और कीटों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता रखती है, जिससे किसानों को नुकसान कम होता है। स्वाद और पोषक गुणों के वजह से रेड ग्लो किस्म की डिमांड हमेशा मंडियों से लेकर बड़े शहरों तक बनी रहती है।

कैसे करें खेती

इस पौधे को लगाने खेत की अच्छी तरह से जुताई करें। आखिरी जुताई में गोबर की खाद या कम्पोस्ट (20-25 टन प्रति हेक्टेयर) मिलाएं, एक पौधे के लिए गड्ढा: 1x1x1 फुट या थोड़ा बड़ा करें। पौधों के बीच दूरी: पंक्ति से पंक्ति 6 फीट, पौधे से पौधा 5 फीट रखें. गर्मी में 3–4 दिन पर और सर्दी में 6–7 दिन पर सिंचाई करें। अधिक पानी से बचें जड़ सड़ सकती है।

रेड ग्लो वैरायटी की खासियत

रेड ग्लो वैरायटी के पपीते अंदर से गहरे लाल या ऑरेंज रंग के होते हैं। इनका स्वाद मीठा और रसदार होता है। फल का आकार बड़ा होने के साथ इनकी शेल्फ लाइफ भी लंबी होती है, यानी दूर तक ले जाकर बेच सकते हैं। एक पेड़ से 80-100 किलोग्राम तक उपज मिल सकती है। पौधे की ऊंचाई लगभग 7 फीट रहती है।

पपीते की खेती के लिए कैसा मौसम सही?

पपीते की खेती गर्म इलाकों में अच्छी होती है। इसके लिए औसत तापमान 22-30 डिग्री सेल्सियस आदर्श माना जाता है। भारत में पपीते की रोपाई तीन समय पर की जाती है।

पपीते की खेती में नई क्रांति ला सकती है रेड ग्लो वैरायटी, घर बैठे NSC से मंगाएं आनलाइन बीज

हाइब्रिड वैरायटी पपीते की खेती में नई क्रांति ला सकती है

भोपाल। कोरोना काल के बाद से किसानों का रुझान पारंपरिक खेती से हटकर नगदी फसल की ओर बढा है। ऐसे में किसानों के लिए पपीते की खेती एक अच्छा विकल्प हो सकती है। किसी भी खेती में सफलता के लिए बीज का चयन सबसे पहला चरण होता है।
किसानों के लिए नेशनल सीड्स कारपोरेशन की रेड ग्लो वैरायटी फायदेमंद साबित हो सकती है। रेड ग्लो हाइब्रिड वैरायटी बेहतर स्वाद, लंबी शेल्फ लाइफ और अधिक उपज के लिए जानी जाती है। नेशनल सीड्स कारपोरेशन के ऑनलाइन स्टोर से आप घर बैठे पपीते के बीज खरीद सकते हैं।

60 दिन बाद मिलने लगता है फल

रेड ग्लो वैरायटी लगाने के 60 दिन बाद से ही फलन देना शुरू कर देगी और एक पौधा 50 से 60 केजी तक का फलन 3 बार देगा, जिससे आप एक बार मै 1 कट्ठा खेत में 75 हजार रूपए कमा सकते हैं।

बीमारियों और कीटों के प्रति प्रतिरोधक

इस वैरायटी के पौधे में एक फल 3 से 4 केजी के होता है। फल काफी मीठा और स्वादिष्ट भी होता है। यह वैरायटी कई तरह की बीमारियों और कीटों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता रखती है, जिससे किसानों को नुकसान कम होता है। स्वाद और पोषक गुणों के वजह से रेड ग्लो किस्म की डिमांड हमेशा मंडियों से लेकर बड़े शहरों तक बनी रहती है।

कैसे करें खेती

इस पौधे को लगाने खेत की अच्छी तरह से जुताई करें। आखिरी जुताई में गोबर की खाद या कम्पोस्ट (20-25 टन प्रति हेक्टेयर) मिलाएं, एक पौधे के लिए गड्ढा: 1x1x1 फुट या थोड़ा बड़ा करें। पौधों के बीच दूरी: पंक्ति से पंक्ति 6 फीट, पौधे से पौधा 5 फीट रखें. गर्मी में 3–4 दिन पर और सर्दी में 6–7 दिन पर सिंचाई करें। अधिक पानी से बचें जड़ सड़ सकती है।

रेड ग्लो वैरायटी की खासियत

रेड ग्लो वैरायटी के पपीते अंदर से गहरे लाल या ऑरेंज रंग के होते हैं। इनका स्वाद मीठा और रसदार होता है। फल का आकार बड़ा होने के साथ इनकी शेल्फ लाइफ भी लंबी होती है, यानी दूर तक ले जाकर बेच सकते हैं। एक पेड़ से 80-100 किलोग्राम तक उपज मिल सकती है। पौधे की ऊंचाई लगभग 7 फीट रहती है।

पपीते की खेती के लिए कैसा मौसम सही?

पपीते की खेती गर्म इलाकों में अच्छी होती है। इसके लिए औसत तापमान 22-30 डिग्री सेल्सियस आदर्श माना जाता है। भारत में पपीते की रोपाई तीन समय पर की जाती है।

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