बैतूल, कृषि विज्ञान केन्द्र, बैतूल के द्वारा ग्राम पाढर में प्राकृतिक खेती पर जागरूकता हेतु संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक आर.डी. बारपेटे, डा. मेघा दुबे, डा. एम.पी. इंगले तथा पाढर ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
डा आर.डी. बारपेटे द्वारा प्राकृतिक खेती में कीट प्रबंधन के बारे में किसानों को जानकारी प्रदान की गई। डा. मेघा दुबे ने प्राकृतिक खेती के महत्व एवं उसमें उपयोग होने वाले विभिन्न अव्यव जैसे- जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, दषपर्णी, नीमास्त्र आदि को बनाने की विधि एवं प्रयोग करने के तरीकों के बारे में बताया गया।
साथ ही डा एम.पी. इंगले द्वारा मोटे अनाज के द्वारा बनाये जाने वाले विभिन्न खाद्य पदार्थों की जानकारी किसानों को दी गई। इस संगोष्ठी में लगभग 100 से अधिक किसान एवं महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी रही एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्री डडोरे का विषेष योगदान रहा।
प्राकृतिक खेती में कीट प्रबंधन के बारे में किसानों को दी जानकारी
बैतूल, कृषि विज्ञान केन्द्र, बैतूल के द्वारा ग्राम पाढर में प्राकृतिक खेती पर जागरूकता हेतु संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक आर.डी. बारपेटे, डा. मेघा दुबे, डा. एम.पी. इंगले तथा पाढर ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
डा आर.डी. बारपेटे द्वारा प्राकृतिक खेती में कीट प्रबंधन के बारे में किसानों को जानकारी प्रदान की गई। डा. मेघा दुबे ने प्राकृतिक खेती के महत्व एवं उसमें उपयोग होने वाले विभिन्न अव्यव जैसे- जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, दषपर्णी, नीमास्त्र आदि को बनाने की विधि एवं प्रयोग करने के तरीकों के बारे में बताया गया।
साथ ही डा एम.पी. इंगले द्वारा मोटे अनाज के द्वारा बनाये जाने वाले विभिन्न खाद्य पदार्थों की जानकारी किसानों को दी गई। इस संगोष्ठी में लगभग 100 से अधिक किसान एवं महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी रही एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्री डडोरे का विषेष योगदान रहा।




