टीकमगढ़, कृषि विज्ञान केंद्र, टीकमगढ़ में प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी. एस. किरार के मार्गदर्शन में साथ ही केंद्र के वैज्ञानिको द्वारा खरीफ मौसम में दलहनी फसलों की उत्पादकता एवं उत्पादन बढ़ाने एव फसल विविधिकारण के उद्देश्य से एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना अंतर्गत आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में टीकमगढ़ जिले के कृषि कल्याण एव कृषि विकास विभाग के कृषि विस्तार अधिकारी एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता दी। प्रशिक्षण के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. बी.एस.किरार द्वारा खरीफ दलहनी फसलों जैसे उड़द, मूंग एवं अरहर की उन्नत उत्पादन तकनीकों पर विस्तार से जानकारी प्रदान की। केंद्र के वैज्ञानिक एव कार्यक्रम प्रभारी डॉ.एस.के.जाटव द्वारा खरीफ में दलहन उत्पादन के लिए उन्नत एवं क्षेत्रानुकूल किस्मों का चयन करें जैसे उर्द की किस्में आई.पी.यू. 13-1, प्रताप उर्द, टी.जे.यू.-339, कोटा उर्द-3 एव इंद्रा उर्द 1 मूंग की प्रमुख उन्नत किस्में एम.एच. -1142, आई.पी.एम.–02-3 (विराट), पूसा विशाल, एच.यू.एम.–16, सम्राट, सोयाबीन की उन्नत एवं नवीन किस्में जे.एस. 95-60, एन.आर.सी. 150, जे.एस. 21-72, ब्लैक बोल्ड अरहर (तूअर) की उन्नत किस्म पूसा अरहर 16, टी.जे.टी. -501, राजीव लोचन, तिल की किस्में टी.के.जी. 308, टी.के.जी. 303, जी.टी.4 का चुनाव करेंI बुवाई से पहले बीज का उपचार कार्बेन्डाजिम 50 WP @ 2 ग्राम/किग्रा बीज अथवा कार्बोक्सिन + थिरम (75 WP) @ 3 ग्राम/किग्रा बीज बीजोपचार करें जिससे इससे जड़ गलन, बीज सड़न एवं अन्य प्रारंभिक फफूंद जनित रोगों को रोका जा सकेंI खरीफ की दलहनी फसलों संतुलित उर्वरक प्रबंधन मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरक का प्रयोग नाइट्रोजन (N): 20 किग्रा/हेक्टेयर (प्रारंभिक वृद्धि हेतु), फॉस्फोरस (P₂O₅): 40–60 किग्रा/हेक्टेयर, पोटाश (K₂O): 20 किग्रा/हेक्टेयर, सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक सल्फेट (ZnSO₄·7 H₂O) @ 25 किग्रा/हेक्टेयर, सल्फर (S) 20–30 किग्रा सल्फर/हेक्टेयर जिप्सम, बेंटोनाइट सल्फर से दें। सल्फर प्रोटीन निर्माण एवं दाना विकास के लिए आवश्यक होता हैंI बोरॉन (B) कमी वाले क्षेत्रों में बोरेक्स @ 10 किग्रा/हेक्टेयर प्रयोग करें। बोरॉन से पोधों में फूल एवं फली बनने में सहायक होता हैं I जैविक खाद (गोबर की खाद, कम्पोस्ट एवं वर्मी कम्पोस्ट) का उपयोग करने से मृदा की संरचना में सुधार, जलधारण क्षमता बढ़ती है, पौधों को धीरे-धीरे पोषक तत्व उपलब्ध होते हैं, जड़ विकास एवं पौध वृद्धि अच्छी होती है,उत्पादन एवं दानों की गुणवत्ता में सुधार होता है। खरपतवार नियंत्रण, कीट एवं रोग प्रबंधन, जल संरक्षण तकनीक तथा मौसम आधारित कृषि प्रबंधन पर व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक जानकारी दी।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि कृषि विस्तार अधिकारी प्रशिक्षण से प्राप्त वैज्ञानिक जानकारी को अधिक से अधिक किसानों तक पहुँचाकर खरीफ दलहनी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँ। साथ ही किसानों को नवीन कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करने एवं समय-समय पर वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराने पर भी चर्चा की गई। प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया तथा वैज्ञानिकों ने कहा कि वैज्ञानिक खेती, गुणवत्तापूर्ण बीज, संतुलित पोषण प्रबंधन एवं समेकित कीट-रोग प्रबंधन अपनाकर दलहनी फसलों की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।
इस अवसर पर केंद्र के वैज्ञानिक डॉ.आर.के प्रजापति, डॉ.एस.के.सिंह, डॉ. यू.एस.धाकड़, डॉ. सतेन्द्र कुमार, डॉ. आई.डी. सिंह, जयपाल पटेल द्वारा इस कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभायाI टीकमगढ़ जिले के कृषि कल्याण एव कृषि विकास विभाग के कृषि विस्तार अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित रहेI
खरीफ दलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाने हेतु कृषि विस्तार अधिकारी एवं कर्मचारियों को एक दिवसीय प्रशिक्षण
टीकमगढ़, कृषि विज्ञान केंद्र, टीकमगढ़ में प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी. एस. किरार के मार्गदर्शन में साथ ही केंद्र के वैज्ञानिको द्वारा खरीफ मौसम में दलहनी फसलों की उत्पादकता एवं उत्पादन बढ़ाने एव फसल विविधिकारण के उद्देश्य से एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना अंतर्गत आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में टीकमगढ़ जिले के कृषि कल्याण एव कृषि विकास विभाग के कृषि विस्तार अधिकारी एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता दी। प्रशिक्षण के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. बी.एस.किरार द्वारा खरीफ दलहनी फसलों जैसे उड़द, मूंग एवं अरहर की उन्नत उत्पादन तकनीकों पर विस्तार से जानकारी प्रदान की। केंद्र के वैज्ञानिक एव कार्यक्रम प्रभारी डॉ.एस.के.जाटव द्वारा खरीफ में दलहन उत्पादन के लिए उन्नत एवं क्षेत्रानुकूल किस्मों का चयन करें जैसे उर्द की किस्में आई.पी.यू. 13-1, प्रताप उर्द, टी.जे.यू.-339, कोटा उर्द-3 एव इंद्रा उर्द 1 मूंग की प्रमुख उन्नत किस्में एम.एच. -1142, आई.पी.एम.–02-3 (विराट), पूसा विशाल, एच.यू.एम.–16, सम्राट, सोयाबीन की उन्नत एवं नवीन किस्में जे.एस. 95-60, एन.आर.सी. 150, जे.एस. 21-72, ब्लैक बोल्ड अरहर (तूअर) की उन्नत किस्म पूसा अरहर 16, टी.जे.टी. -501, राजीव लोचन, तिल की किस्में टी.के.जी. 308, टी.के.जी. 303, जी.टी.4 का चुनाव करेंI बुवाई से पहले बीज का उपचार कार्बेन्डाजिम 50 WP @ 2 ग्राम/किग्रा बीज अथवा कार्बोक्सिन + थिरम (75 WP) @ 3 ग्राम/किग्रा बीज बीजोपचार करें जिससे इससे जड़ गलन, बीज सड़न एवं अन्य प्रारंभिक फफूंद जनित रोगों को रोका जा सकेंI खरीफ की दलहनी फसलों संतुलित उर्वरक प्रबंधन मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरक का प्रयोग नाइट्रोजन (N): 20 किग्रा/हेक्टेयर (प्रारंभिक वृद्धि हेतु), फॉस्फोरस (P₂O₅): 40–60 किग्रा/हेक्टेयर, पोटाश (K₂O): 20 किग्रा/हेक्टेयर, सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक सल्फेट (ZnSO₄·7 H₂O) @ 25 किग्रा/हेक्टेयर, सल्फर (S) 20–30 किग्रा सल्फर/हेक्टेयर जिप्सम, बेंटोनाइट सल्फर से दें। सल्फर प्रोटीन निर्माण एवं दाना विकास के लिए आवश्यक होता हैंI बोरॉन (B) कमी वाले क्षेत्रों में बोरेक्स @ 10 किग्रा/हेक्टेयर प्रयोग करें। बोरॉन से पोधों में फूल एवं फली बनने में सहायक होता हैं I जैविक खाद (गोबर की खाद, कम्पोस्ट एवं वर्मी कम्पोस्ट) का उपयोग करने से मृदा की संरचना में सुधार, जलधारण क्षमता बढ़ती है, पौधों को धीरे-धीरे पोषक तत्व उपलब्ध होते हैं, जड़ विकास एवं पौध वृद्धि अच्छी होती है,उत्पादन एवं दानों की गुणवत्ता में सुधार होता है। खरपतवार नियंत्रण, कीट एवं रोग प्रबंधन, जल संरक्षण तकनीक तथा मौसम आधारित कृषि प्रबंधन पर व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक जानकारी दी।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि कृषि विस्तार अधिकारी प्रशिक्षण से प्राप्त वैज्ञानिक जानकारी को अधिक से अधिक किसानों तक पहुँचाकर खरीफ दलहनी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँ। साथ ही किसानों को नवीन कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करने एवं समय-समय पर वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराने पर भी चर्चा की गई। प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया तथा वैज्ञानिकों ने कहा कि वैज्ञानिक खेती, गुणवत्तापूर्ण बीज, संतुलित पोषण प्रबंधन एवं समेकित कीट-रोग प्रबंधन अपनाकर दलहनी फसलों की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।
इस अवसर पर केंद्र के वैज्ञानिक डॉ.आर.के प्रजापति, डॉ.एस.के.सिंह, डॉ. यू.एस.धाकड़, डॉ. सतेन्द्र कुमार, डॉ. आई.डी. सिंह, जयपाल पटेल द्वारा इस कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभायाI टीकमगढ़ जिले के कृषि कल्याण एव कृषि विकास विभाग के कृषि विस्तार अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित रहेI
खरीफ दलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाने हेतु कृषि विस्तार अधिकारी एवं कर्मचारियों को एक दिवसीय प्रशिक्षण


