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गर्मी के मौसम में खीरे की खेती, कम समय और कम लागत में अच्छी कमाई, जानें कैसे करें

भोपाल, गर्मी के मौसम में खीरे की डिमांड कापफी बढ जाती है। ऐसे में गेहूं की फसल कटने के बाद किसान खाली खेत में खीरे की खेती करके बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं। खीरे की खेती के लिए दोमट या रेतीली मिट्टी उपयुक्त होती है।

कम समय में अच्छी कमाई

अगर आप कम समय में अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो खीरे की खेती आपके लिए बढ़िया विकल्प हो सकता है। गेहूं की फसल काटने के बाद खाली खेत में खीरे की खेती की जाए तो फायदे का सौदा साबित हो सकती है।

अप्रैल में करें बुवाई, जून से तुड़ाई

खीरा एक ऐसी फसल है जो गर्म और नम जलवायु में अच्छी पैदावार देती है। खीरे की खेती के लिए तापमान 25 से 35 डिग्री सेल्सियस सबसे उपयुक्त माना जाता है। अप्रैल में बुवाई करके जून तक तुड़ाई शुरू की जा सकती है। गर्मियों में खीरे की खेती से किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं।

खीरे की खेती के लिए उपयुक्त मिटटी

खीरे की खेती के लिए दोमट या रेतीली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है। मिट्टी का pH 6 से 7 के बीच होना चाहिए। खेत में पानी का अच्छा निकास जरूरी है। क्योंकि ज्यादा पानी खीरे की फसल को नुकसान पहुंचा सकता है।

खीरे की खेती के लिए खेत की तैयारी

खीरे की खेती के लिए खेत की तैयारी सबसे अहम होती है। सबसे पहले खेत को 2-3 बार अच्छी तरह जोतें ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए। आखिरी जुताई में 8-10 टन प्रति एकड़ सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं। मेड़ या क्यारी बनाएं. लाइन से लाइन की दूरी 60 से 150 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 15 से 60 सेंटीमीटर रखें। कुछ किसान प्लास्टिक मल्चिंग का इस्तेमाल करते हैं, जिससे नमी बनी रहती है और खरपतवार कम होते हैं।

बुवाई की विधि और बीज की मात्रा

खीरे की खेती के लिए एक एकड़ खेत के लिए लगभग 1 किलोग्राम बीज काफी होते हैं। हाइब्रिड किस्मों में 200-400 ग्राम प्रति एकड़ भी पर्याप्त होते हैं। प्रति हेक्टेयर 2-3 किलो बीज की जरूरत पड़ती है। बुवाई से पहले बीजों को 4-6 घंटे पानी में भिगोकर उपचारित करें। बीज को 2-3 सेंटीमीटर गहराई पर बोएं।

खीरे की उन्नत किस्में

पूसा उदय, पूसा बर्खा, पंजाब नवीन, एचडब्लू-216, स्वर्ण पूर्णिमा किस्म, पूसा संयोग किस्म, पंत संकर खीरा- 1 किस्म, स्वर्ण शीतल किस्म, स्वर्ण पूर्णा आदि किस्में जल्दी तैयार होती हैं। इनमें रोग लगने की संभावना भी कम होती है।

खाद और उर्वरक

खीरे की फसल में गोबर की खाद के अलावा नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश दें। नाइट्रोजन को तीन हिस्सों में बांटकर दें। जैसे बुवाई के समय, फूल आने पर और फल बनते समय। समय-समय पर जैविक खाद या पत्ती स्प्रे का इस्तेमाल करें।

सिंचाई और देखभाल

गर्मी में खीरे को ज्यादा पानी की जरूरत होती है। कुल 10-12 सिंचाई करनी पडती है। बुवाई से पहले एक सिंचाई जरूर करें। शुरुआत में 2-3 दिन के अंतराल पर पानी दें। बाद में 4-5 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें। ड्रिप सिंचाई सबसे अच्छी रहती है क्योंकि इससे पानी बचता है और जड़ों को सीधा पानी मिलता है। खरपतवार निकालने के लिए 2-3 बार निराई-गुड़ाई करना उचित है।

गर्मी के मौसम में खीरे की खेती, कम समय और कम लागत में अच्छी कमाई, जानें कैसे करें

भोपाल, गर्मी के मौसम में खीरे की डिमांड कापफी बढ जाती है। ऐसे में गेहूं की फसल कटने के बाद किसान खाली खेत में खीरे की खेती करके बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं। खीरे की खेती के लिए दोमट या रेतीली मिट्टी उपयुक्त होती है।

कम समय में अच्छी कमाई

अगर आप कम समय में अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो खीरे की खेती आपके लिए बढ़िया विकल्प हो सकता है। गेहूं की फसल काटने के बाद खाली खेत में खीरे की खेती की जाए तो फायदे का सौदा साबित हो सकती है।

अप्रैल में करें बुवाई, जून से तुड़ाई

खीरा एक ऐसी फसल है जो गर्म और नम जलवायु में अच्छी पैदावार देती है। खीरे की खेती के लिए तापमान 25 से 35 डिग्री सेल्सियस सबसे उपयुक्त माना जाता है। अप्रैल में बुवाई करके जून तक तुड़ाई शुरू की जा सकती है। गर्मियों में खीरे की खेती से किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं।

खीरे की खेती के लिए उपयुक्त मिटटी

खीरे की खेती के लिए दोमट या रेतीली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है। मिट्टी का pH 6 से 7 के बीच होना चाहिए। खेत में पानी का अच्छा निकास जरूरी है। क्योंकि ज्यादा पानी खीरे की फसल को नुकसान पहुंचा सकता है।

खीरे की खेती के लिए खेत की तैयारी

खीरे की खेती के लिए खेत की तैयारी सबसे अहम होती है। सबसे पहले खेत को 2-3 बार अच्छी तरह जोतें ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए। आखिरी जुताई में 8-10 टन प्रति एकड़ सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं। मेड़ या क्यारी बनाएं. लाइन से लाइन की दूरी 60 से 150 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 15 से 60 सेंटीमीटर रखें। कुछ किसान प्लास्टिक मल्चिंग का इस्तेमाल करते हैं, जिससे नमी बनी रहती है और खरपतवार कम होते हैं।

बुवाई की विधि और बीज की मात्रा

खीरे की खेती के लिए एक एकड़ खेत के लिए लगभग 1 किलोग्राम बीज काफी होते हैं। हाइब्रिड किस्मों में 200-400 ग्राम प्रति एकड़ भी पर्याप्त होते हैं। प्रति हेक्टेयर 2-3 किलो बीज की जरूरत पड़ती है। बुवाई से पहले बीजों को 4-6 घंटे पानी में भिगोकर उपचारित करें। बीज को 2-3 सेंटीमीटर गहराई पर बोएं।

खीरे की उन्नत किस्में

पूसा उदय, पूसा बर्खा, पंजाब नवीन, एचडब्लू-216, स्वर्ण पूर्णिमा किस्म, पूसा संयोग किस्म, पंत संकर खीरा- 1 किस्म, स्वर्ण शीतल किस्म, स्वर्ण पूर्णा आदि किस्में जल्दी तैयार होती हैं। इनमें रोग लगने की संभावना भी कम होती है।

खाद और उर्वरक

खीरे की फसल में गोबर की खाद के अलावा नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश दें। नाइट्रोजन को तीन हिस्सों में बांटकर दें। जैसे बुवाई के समय, फूल आने पर और फल बनते समय। समय-समय पर जैविक खाद या पत्ती स्प्रे का इस्तेमाल करें।

सिंचाई और देखभाल

गर्मी में खीरे को ज्यादा पानी की जरूरत होती है। कुल 10-12 सिंचाई करनी पडती है। बुवाई से पहले एक सिंचाई जरूर करें। शुरुआत में 2-3 दिन के अंतराल पर पानी दें। बाद में 4-5 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें। ड्रिप सिंचाई सबसे अच्छी रहती है क्योंकि इससे पानी बचता है और जड़ों को सीधा पानी मिलता है। खरपतवार निकालने के लिए 2-3 बार निराई-गुड़ाई करना उचित है।

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