किसान कहानी, अनुभव, सफलता
धरातल से दूर उद्यानिकी विभाग की योजनाएं
उद्यानिकी फसलों की खेती करने वाले किसानों को घटा, कैस बढ़ेगी 2022 तक आय भोपाल, मध्यप्रदेश में सरकार उद्यानिकी फसलों का बढ़ावा देने के ...
श्योपुर का अमरूद विदेशों में भरेगा उड़ान
जिले के अमरूद का स्वाद विदेशों व हवाई सफर में भी ले सकेंगे अब पल्प और जूस निकालने जर्मनी से मध्यप्रदेश आएगी मशीन मप्र ...
गांव की लायब्रेरी में किसानों को मिलेगा खेती किसानी का ज्ञान
कृषि साहित्य से ज्ञानार्जन आयेगा किसानों के काम khemraj mouryaशिवपुरी। कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा किसानों को हर समय सरल और सुलभ ज्ञान प्राप्त होता ...
जैविक खाद बनाने वाले प्लांट बन गए कचरा, ‘गोबर’ में डूब गया मुरैना ननि का करोडों रुपया
मुरैना शहर में कचरे के साथ फेंके जाने वाले गोबर से जैविक खाद (केंचुआ पद्धति से) बनाकर, नगर निगम की आय बढ़ाने की योजना बनाई गई थी, इसके लिए जैविक खाद के कई प्लांट बनाए, लेकिन यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी। योजना तो गोबर से जैविक खाद बनाक करोड़ों रुपए कमाने की थी, लेकिन हकीकत यह है कि जैविक खाद प्लांट पर नगर निगम ने जितना खर्च किया वह भी डूब गया और जैविक खाद बनाने के यह प्लांट खुद ही कचरे में तब्दील हो गए।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 106 प्रजातियों की घास के मिले प्रमाण
तपुड़ा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में घास की 106 प्रजातियों उपलब्ध होने के प्रमाण मिले हैं। बड़े घास के मैदान के साथ ही छोटे घने, घास के मैदानों में ये प्रजातियां मौजूद हैं। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा विशेषज्ञों की मदद से फील्ड में तैनात वनकर्मियों को घास के बारे में जानकारी दी जा रही है। यह पहला मौका है जब घास की सभी 106 प्रजातियों को सूचीबद्ध किया गया है।
देश में 50 फीसदी किसान कर्जदार, पांच साल में औसत लोन 47000 से बढ़कर 74121 हुआ
50.2 फीसदी किसान परिवारों ने लिया कर्ज नई दिल्ली/भोपाल। मोदी सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का हर संभव प्रयास कर रही है। सरकार ...
उज्जैन में ड्रोन ने खींची मालिकाना हक की तस्वीर
मध्य प्रदेश में बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन तीसरा शहर है, जहां केंद्र सरकार की स्वामित्व के सर्वे अभियान की शुरुआत की गई है। बीते दो दिनों में सर्वे आफ इंडिया की टीम ने राजस्व विभाग और ग्राम पंचायतों के साथ मिलकर ड्रोन से ग्रामीणों के जमीन व मकान के मालिकाना हक की तस्वीर खींची है।
भंग गौ-सदन बहाल हो जाएं तो सड़क पर नहीं दिखेंगी गाय
मध्यप्रदेश में सिर्फ सरकार गौशालाएं नहीं चला सकती है। हां, वो अपने हिस्से का काम बाखूबी कर रही है। गौ-पालन और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्सहित कर रही है। गौशाला के संचालन और उनके संरक्षण के लिए स्वयं सेवी संस्थाओं, एनजीओ और आम लोगों को आगे आना होगा।
पौधों को लगाएं, उनका पालन-पोषण कर उनको वृक्ष बनाएंं
satish sahu बैतूल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर पोषण वाटिका महाअभियान और पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र बैतूल में ...
प्रधानमंत्री वनधन योजना के अंतर्गत शहद संग्रहण, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग एवं मार्केटिंग का प्रशिक्षण
सीडीवीडी संस्था ने वन धन केंद्र को दे रहे तकनीकी प्रशिक्षण javed aliमण्डला। जिले में लोगों को रोजगार उपलब्ध करने एवं वनों के उत्पाद ...




