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बिना खाद के धान की खेती, होगा अच्छा उत्पादन, जानिए कैसे ?

भोपाल, धान की खेती में यूरिया और पोटाश खाद का बडा महत्व होता है। ये माना जाता है कि बिना यूरिया और पोटाश डाले धान की खेती अब संभव नहीं है। वैसे तो धान की रोपाई के 20 दिन बाद पफसल में रासायनिक उर्वरक डाला जाता है। लेकिन एक छोटे से प्रयोग से धान की पत्तियां अधिक हरी, चमकदार और रोगमुक्त बनी रहती हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है। नियमित उपयोग से मिट्टी भुरभुरी बनती है, जिससे जड़ों का फैलाव बेहतर होता है और मिट्टी में पानी रोकने की क्षमता बढ़ती है।

धान की खेती किसानों के लिए फायदेमंद

उप्र और मप्र के कुछ भागों में बहुतायत में धान की खेती की जाती है। धान की खेती किसानों के लिए हमेशा से फायदे का सौदा रही है। अक्सर किसान धान की रोपाई के 20 दिन बाद खेत में रासायनिक उर्वरक डालते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार रासायनिक खाद की जगह सरसों की खली का इस्तेमाल धान के पौध के लिए ये रामबाण मानी जाती है। सरसों की खली में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटैशियम के साथ कई सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं।

सरसों की खली धान की फसल के लि रामबाण

कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि सरसों की खली में मौजूद तत्व धान के पौधे को मजबूत बनाते हैं, साथ ही उसकी जड़ों को गहराई तक पोषण देते हैं। खली के प्रयोग से धान की पत्तियां अधिक हरी, चमकदार और रोगमुक्त बनी रहती हैं। यह मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने में भी सहायक है, जिससे खेत की गुणवत्ता वर्षों तक बनी रहती है।

उत्पादन और मिटटी की गुणवत्ता में बढोत्तरी

धान की रोपाई के बाद किसान यूरिया और डीएपी जैसे रासायनिक खादों का उपयोग करते हैं। इससे फसल तो तेजी से बढ़ती है, लेकिन मिट्टी की ताकत हर साल घटती जाती है। इससे धीरे-धीरे फसल का उत्पादन कम होता जा रहा है। इससे निपटने के लिए कुछ किसानों ने सरसों की खली का उपयोग करना शुरू कर दिया है। इससे फसल की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है और उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।

सरसों की खली एक बेहतरीन जैविक खाद

सरसों की खली एक बेहतरीन जैविक खाद है, जो मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ाकर उसकी उर्वरता में सुधार करती है। इसके नियमित उपयोग से मिट्टी भुरभुरी बनती है, जिससे जड़ों का फैलाव बेहतर होता है और मिट्टी में पानी रोकने की क्षमता बढ़ती है। लाभकारी सूक्ष्मजीव सक्रिय होकर पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं, बढ़वार अच्छी होती है और फसल स्वस्थ रहती है। यही कारण है कि कृषि विशेषज्ञ संतुलित मात्रा में सरसों की खली के उपयोग को टिकाऊ और लाभकारी खेती के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। धान की रोपाई के शुरुआती दिनों में पौधे नई जगह पर अपनी जड़ें फैलाते हैं। लगभग 20 दिन बाद पौधों की वृद्धि तेज होने लगती है और उन्हें अधिक पोषण की आवश्यकता होती है। इस समय सरसों की खली डालने से पौधों को धीरे-धीरे पोषक तत्व मिलते रहते हैं, जिससे कल्ले (टिलर) अधिक निकलते हैं और फसल का विकास बेहतर होता है।

खली की मात्रा और प्रयोग विधि

किसान प्रति एकड़ लगभग 80 से 100 किलोग्राम सरसों की खली का उपयोग कर सकते हैं। खली को खेत में समान रूप से बिखेरें और हल्की सिंचाई या खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें ताकि यह धीरे-धीरे गलकर मिट्टी में मिल जाए। कई किसान इसे पहले 24 से 48 घंटे पानी में भिगोकर घोल बनाकर भी उपयोग करते हैं। सरसों की खली का प्रयोग बेहद सरल है। खेत की जुताई के समय या रोपाई के तुरंत बाद भी इसे मिट्टी में अच्छी तरह मिला सकते हैं। पानी देने के बाद खली धीरे-धीरे घुलकर पौधों को पोषण देती रहती है। इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता और मिट्टी में जैविक क्रियाओं को भी प्रोत्साहन मिलता है।

ध्यान रखने वाली बात

धान के खेत में सरसों की खली डालते समय कुछ बातों का ध्यान रखें। ताजी खली की जगह अच्छी तरह सूखी या सड़ी-गली खली का प्रयोग करें। अधिक मात्रा में एक साथ प्रयोग न करें। खेत में पर्याप्त नमी बनी रहनी चाहिए। यदि पहले से अधिक नाइट्रोजन दी जा चुकी है, तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार मात्रा तय करें।

बिना खाद के धान की खेती, होगा अच्छा उत्पादन, जानिए कैसे ?

भोपाल, धान की खेती में यूरिया और पोटाश खाद का बडा महत्व होता है। ये माना जाता है कि बिना यूरिया और पोटाश डाले धान की खेती अब संभव नहीं है। वैसे तो धान की रोपाई के 20 दिन बाद पफसल में रासायनिक उर्वरक डाला जाता है। लेकिन एक छोटे से प्रयोग से धान की पत्तियां अधिक हरी, चमकदार और रोगमुक्त बनी रहती हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है। नियमित उपयोग से मिट्टी भुरभुरी बनती है, जिससे जड़ों का फैलाव बेहतर होता है और मिट्टी में पानी रोकने की क्षमता बढ़ती है।

धान की खेती किसानों के लिए फायदेमंद

उप्र और मप्र के कुछ भागों में बहुतायत में धान की खेती की जाती है। धान की खेती किसानों के लिए हमेशा से फायदे का सौदा रही है। अक्सर किसान धान की रोपाई के 20 दिन बाद खेत में रासायनिक उर्वरक डालते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार रासायनिक खाद की जगह सरसों की खली का इस्तेमाल धान के पौध के लिए ये रामबाण मानी जाती है। सरसों की खली में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटैशियम के साथ कई सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं।

सरसों की खली धान की फसल के लि रामबाण

कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि सरसों की खली में मौजूद तत्व धान के पौधे को मजबूत बनाते हैं, साथ ही उसकी जड़ों को गहराई तक पोषण देते हैं। खली के प्रयोग से धान की पत्तियां अधिक हरी, चमकदार और रोगमुक्त बनी रहती हैं। यह मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने में भी सहायक है, जिससे खेत की गुणवत्ता वर्षों तक बनी रहती है।

उत्पादन और मिटटी की गुणवत्ता में बढोत्तरी

धान की रोपाई के बाद किसान यूरिया और डीएपी जैसे रासायनिक खादों का उपयोग करते हैं। इससे फसल तो तेजी से बढ़ती है, लेकिन मिट्टी की ताकत हर साल घटती जाती है। इससे धीरे-धीरे फसल का उत्पादन कम होता जा रहा है। इससे निपटने के लिए कुछ किसानों ने सरसों की खली का उपयोग करना शुरू कर दिया है। इससे फसल की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है और उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।

सरसों की खली एक बेहतरीन जैविक खाद

सरसों की खली एक बेहतरीन जैविक खाद है, जो मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ाकर उसकी उर्वरता में सुधार करती है। इसके नियमित उपयोग से मिट्टी भुरभुरी बनती है, जिससे जड़ों का फैलाव बेहतर होता है और मिट्टी में पानी रोकने की क्षमता बढ़ती है। लाभकारी सूक्ष्मजीव सक्रिय होकर पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं, बढ़वार अच्छी होती है और फसल स्वस्थ रहती है। यही कारण है कि कृषि विशेषज्ञ संतुलित मात्रा में सरसों की खली के उपयोग को टिकाऊ और लाभकारी खेती के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। धान की रोपाई के शुरुआती दिनों में पौधे नई जगह पर अपनी जड़ें फैलाते हैं। लगभग 20 दिन बाद पौधों की वृद्धि तेज होने लगती है और उन्हें अधिक पोषण की आवश्यकता होती है। इस समय सरसों की खली डालने से पौधों को धीरे-धीरे पोषक तत्व मिलते रहते हैं, जिससे कल्ले (टिलर) अधिक निकलते हैं और फसल का विकास बेहतर होता है।

खली की मात्रा और प्रयोग विधि

किसान प्रति एकड़ लगभग 80 से 100 किलोग्राम सरसों की खली का उपयोग कर सकते हैं। खली को खेत में समान रूप से बिखेरें और हल्की सिंचाई या खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें ताकि यह धीरे-धीरे गलकर मिट्टी में मिल जाए। कई किसान इसे पहले 24 से 48 घंटे पानी में भिगोकर घोल बनाकर भी उपयोग करते हैं। सरसों की खली का प्रयोग बेहद सरल है। खेत की जुताई के समय या रोपाई के तुरंत बाद भी इसे मिट्टी में अच्छी तरह मिला सकते हैं। पानी देने के बाद खली धीरे-धीरे घुलकर पौधों को पोषण देती रहती है। इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता और मिट्टी में जैविक क्रियाओं को भी प्रोत्साहन मिलता है।

ध्यान रखने वाली बात

धान के खेत में सरसों की खली डालते समय कुछ बातों का ध्यान रखें। ताजी खली की जगह अच्छी तरह सूखी या सड़ी-गली खली का प्रयोग करें। अधिक मात्रा में एक साथ प्रयोग न करें। खेत में पर्याप्त नमी बनी रहनी चाहिए। यदि पहले से अधिक नाइट्रोजन दी जा चुकी है, तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार मात्रा तय करें।

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