टीकमगढ़, जिले में अभी तक वर्षा या वुबाई के इस समय के मौजूदा अल निनो के प्रभावों के हालातों में जो कुछ दिन पहले वर्षा देरी से मानसून आने के बाद वुबाई हुई थी जिससे सोयाबीन, उड़द, मूंग और तिल की किसानो ने वुबाई की थी फिर अभी फसल की अंकुरण से लेकर पौध अवस्था में फसले है जिसके लिए वर्षा अभी तक नहीं हुई और ऐसी परिस्थिति को सुखा अवधि कहा जाता है यह 7-10 दिन या 20 दिनों का होता है इस अवधि में किसानो को ड्राई स्पेल अथवा सूखा अवधि से बचने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र, के बैज्ञानिको डॉ. आर.के. प्रजापति, डॉ. एस.के. सिंह, डॉ. यू.एस. धाकड़, डॉ. एस.के. जाटव, डॉ. आई.डी. सिंह और जयपाल छिगारहा द्वारा बताया गया कि प्रमुख रूप से अभी जब तक अगली बारिष नहीं होती है या फसल अवधि के दौरान पड़ने वाले सूखा अवधि से बचने के उपाय जानकारी दी जा रही है बैज्ञानिको की सलाह के अनुसार, कतारों के बीच हैंड व्हील हो या कुदाली से हल्की गुड़ाई करें। इससे मिट्टी की ऊपरी परत टूटकर “मृदा आवरण” बनाएगी, जो जमीन की नमी को उड़ने से रोकेगी। पौधों की छंटनी – यदि उड़द और मूंग के पौधे बहुत पास-पास उग आए हैं, तो कमजोर पौधों को उखाड़कर दूरी बढ़ा दें । इससे बचे हुए पौधों को कम पानी में भी जीवित रहने का मौका मिलेगा। खली जगह पर लगायें और खरपतवार: जहां बीज नहीं उगे हैं वहां गैप फिलिंग करें और खेत के खरपतवार पूरी तरह साफ रखें ताकि वे मिट्टी की बची-खुची नमी न सोखें। अगले 3 दिनों का आपातकालीन छिडकाव 1% पोटैशियम क्लोराइड 1% अथवा 10 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करे और यदि धूप बहुत तेज है और पौधे कुम्हला रहे हैं, तो म्यूरेट ऑफ पोटाश का 1% घोल (10 ग्राम प्रति लीटर पानी) घोल बनाकर छिड़काव करें। जिले की मिट्टियों मे पौधों को सूखे अथवा कम नमी के समय सहने की शक्ति देता है। काओलिन छिडकाव: पत्तियों से पानी का वाष्पीकरण रोकने के लिए काओलिन (6%) का छिड़काव करें। यदि आपके पास कुएं या ट्यूबवेल में थोड़ा भी पानी उपलब्ध है, वर्षा जल का संरक्षण कर लेते है उपलब्ध पानी को स्प्रिंकलर (फव्वारा विधि से) चलाकर फसलों को केवल जीवन रक्षक (हल्की) सिंचाई दें। यदि किसान भाई सोयबीन और उर्द की वुबाई मेड़ और नाली विधि से बोनी की है तो पानी का जल निकास और वर्षा जल संरक्षण एवं नमी संरक्षण दोनों हो जाते है और अगर एसा नहीं किया है तो समतल खेत पर 4-5 मीटर की दुरी पर लम्बी एवं 1 फिर गहरी नालियां बना देना चाहिए । रोग एवं कीट का प्रकोप होने पर फफूंद नाशक एवं कीट नाशकों का प्रयोग वैज्ञानिको की सलाह अनुसार ही करना चाहिए । इस समय जिले की खरीफ फसलों सोयाबीन, उड़द, मूंग और तिल में अंकुरण या पौध अवस्था चल रही है तथा पिछले कुछ दिनों से सूखे की अवधि हुई है जिससे फसलों को बचने लिए कृषि विज्ञान केंद्र में प्रशिक्षण आयोजित किया गया जिसमे ग्राम नगारा के 53 कृषकों को सूखा अवधि में फसलो को बचने के उपाय बताये गए एवं पहिया साइकिल गुड़ाई यन्त्र का प्रदर्शन भी किया गया ।
सूखा अवधि (ड्राई स्पेल) के दौरान खरीफ फसलों के बचाव हेतु उपाय करे किसान
टीकमगढ़, जिले में अभी तक वर्षा या वुबाई के इस समय के मौजूदा अल निनो के प्रभावों के हालातों में जो कुछ दिन पहले वर्षा देरी से मानसून आने के बाद वुबाई हुई थी जिससे सोयाबीन, उड़द, मूंग और तिल की किसानो ने वुबाई की थी फिर अभी फसल की अंकुरण से लेकर पौध अवस्था में फसले है जिसके लिए वर्षा अभी तक नहीं हुई और ऐसी परिस्थिति को सुखा अवधि कहा जाता है यह 7-10 दिन या 20 दिनों का होता है इस अवधि में किसानो को ड्राई स्पेल अथवा सूखा अवधि से बचने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र, के बैज्ञानिको डॉ. आर.के. प्रजापति, डॉ. एस.के. सिंह, डॉ. यू.एस. धाकड़, डॉ. एस.के. जाटव, डॉ. आई.डी. सिंह और जयपाल छिगारहा द्वारा बताया गया कि प्रमुख रूप से अभी जब तक अगली बारिष नहीं होती है या फसल अवधि के दौरान पड़ने वाले सूखा अवधि से बचने के उपाय जानकारी दी जा रही है बैज्ञानिको की सलाह के अनुसार, कतारों के बीच हैंड व्हील हो या कुदाली से हल्की गुड़ाई करें। इससे मिट्टी की ऊपरी परत टूटकर “मृदा आवरण” बनाएगी, जो जमीन की नमी को उड़ने से रोकेगी। पौधों की छंटनी – यदि उड़द और मूंग के पौधे बहुत पास-पास उग आए हैं, तो कमजोर पौधों को उखाड़कर दूरी बढ़ा दें । इससे बचे हुए पौधों को कम पानी में भी जीवित रहने का मौका मिलेगा। खली जगह पर लगायें और खरपतवार: जहां बीज नहीं उगे हैं वहां गैप फिलिंग करें और खेत के खरपतवार पूरी तरह साफ रखें ताकि वे मिट्टी की बची-खुची नमी न सोखें। अगले 3 दिनों का आपातकालीन छिडकाव 1% पोटैशियम क्लोराइड 1% अथवा 10 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करे और यदि धूप बहुत तेज है और पौधे कुम्हला रहे हैं, तो म्यूरेट ऑफ पोटाश का 1% घोल (10 ग्राम प्रति लीटर पानी) घोल बनाकर छिड़काव करें। जिले की मिट्टियों मे पौधों को सूखे अथवा कम नमी के समय सहने की शक्ति देता है। काओलिन छिडकाव: पत्तियों से पानी का वाष्पीकरण रोकने के लिए काओलिन (6%) का छिड़काव करें। यदि आपके पास कुएं या ट्यूबवेल में थोड़ा भी पानी उपलब्ध है, वर्षा जल का संरक्षण कर लेते है उपलब्ध पानी को स्प्रिंकलर (फव्वारा विधि से) चलाकर फसलों को केवल जीवन रक्षक (हल्की) सिंचाई दें। यदि किसान भाई सोयबीन और उर्द की वुबाई मेड़ और नाली विधि से बोनी की है तो पानी का जल निकास और वर्षा जल संरक्षण एवं नमी संरक्षण दोनों हो जाते है और अगर एसा नहीं किया है तो समतल खेत पर 4-5 मीटर की दुरी पर लम्बी एवं 1 फिर गहरी नालियां बना देना चाहिए । रोग एवं कीट का प्रकोप होने पर फफूंद नाशक एवं कीट नाशकों का प्रयोग वैज्ञानिको की सलाह अनुसार ही करना चाहिए । इस समय जिले की खरीफ फसलों सोयाबीन, उड़द, मूंग और तिल में अंकुरण या पौध अवस्था चल रही है तथा पिछले कुछ दिनों से सूखे की अवधि हुई है जिससे फसलों को बचने लिए कृषि विज्ञान केंद्र में प्रशिक्षण आयोजित किया गया जिसमे ग्राम नगारा के 53 कृषकों को सूखा अवधि में फसलो को बचने के उपाय बताये गए एवं पहिया साइकिल गुड़ाई यन्त्र का प्रदर्शन भी किया गया ।
सूखा अवधि (ड्राई स्पेल) के दौरान खरीफ फसलों के बचाव हेतु उपाय करे किसान




