टीकमगढ़, कृषि विज्ञान केंद्र, टीकमगढ़ के वैज्ञानिक दल डॉ. बी.एस. किरार, डॉ. आर.के. प्रजापति, डॉ.एस.के. सिंह, डॉ.एस.के. जाटव, डॉ. आई.डी. सिंह एवं जयपाल छिगारहा ने ग्राम नैनवारी, राधापुर, सोरियाना, लार, नगारा आदि ग्रामो का बुंदेलखंड सामाजिक सेवा संस्थान के स्थानिक ग्रामीण कार्य कर्ताओ मनोज लोधी, रीना कुशवाहा, नैंसी प्रजापति, कुलदीप सिंह एवं दशरथ कुशवाहा के साथ मिलकर फसलों में सोयबीन, उर्द मूंगफली एवं तिल का किसानो के खेतों में रोग एवं कीट की स्थिति का निरिक्षण किया जिसमे किसानो को पौध संरक्षण के लिए उपाय बताये । सोयाबीन, उड़द, तिल और मूंगफली की खेती में अक्सर इल्लियों और रस चूसने वाले कीटों का प्रकोप देखने को मिलता है, जिनसे बचाव के लिए नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और अग्नि-अस्त्र दश्पर्णी जैसे पारंपरिक रूप से तैयार जैविक उपाय अत्यंत कारगर साबित होते हैं। कीटों की शुरुआती अवस्था और हल्के प्रकोप (जैसे माहू या सफेद मक्खी) के लिए नीमास्त्र सबसे बेहतर विकल्प है, जिसे तैयार करने के लिए 5 किलो कुटी हुई नीम की पत्तियां, 5 लीटर देशी गाय का गोमूत्र, 1 किलो ताजा गोबर और 100 लीटर पानी को एक बड़े ड्रम में मिलाकर 48 घंटे तक छांव में रखा जाता है।
इस दौरान दिन में दो बार इसे लकड़ी से चलाएं और फिर कपड़े से छानकर 2.5 लीटर प्रति एकड़ दर से छिड़काव करें। जब फसल पर बड़ी इल्लियों, लार्वा या फल/फली छेदक कीटों का प्रकोप हो, तब ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया जाना चाहिए। इसे बनाने के लिए 10 लीटर गोमूत्र में नीम, धतूरा, सीताफल, पपीता, अमरूद या करंज जैसी किन्हीं 5 प्रकार की कड़वी पत्तियों (कुल 10 किलो) का पेस्ट मिलाकर धीमी आंच पर 3-4 बार उबाला जाता है। इसके 48 घंटे बाद इसे छानकर, 6 से 8 लीटर ब्रह्मास्त्र को 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिडकाव किया जाता है। यदि कीट अधिक प्रतिरोधी और गंभीर रूप धारण कर लें, तो सबसे तीखे और असरदार अग्नि-अस्त्र का प्रयोग करना चाहिए। इसे तैयार करने के लिए 20 लीटर गोमूत्र में 2 किलो नीम पेस्ट, 500 ग्राम हरी मिर्च पेस्ट, 500 ग्राम लहसुन पेस्ट और 500 ग्राम तंबाकू पाउडर डालकर 1-2 उबाल आने तक गर्म किया जाता है, फिर 48 घंटे ठंडा होने के बाद छानकर 6-8 लीटर मिश्रण को 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जाता है। जैविक नियंत्रण को पूरी तरह सफल बनाने के लिए छिड़काव हमेशा सुबह या शाम के समय ही करना चाहिए ताकि मित्र कीट सुरक्षित रहें। साथ ही, खेत में लगातार एक ही फसल उगाने से बचकर फसल चक्र और अंतर-फसल पद्धतियों को अपनाना चाहिए। फफूंद जनित रोगों और शुरुआती बीमारियों से सुरक्षा के लिए प्राकृतिक खेती के घटक से तैयार बीजामृत से बीज उपचार करें और नमी वाले मौसम में पुरानी खट्टी छाछ को पानी में मिलाकर छिड़कें, जिससे फसलें पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित रहेंगी। रासायनिक दवाओं का उपयोग अंतिम विकल्प के रूप में अपनाना चाहिए तथा रासायनिक दवाओं की सही मात्र नियमित निगरानी के बाद ही करना चाहिए जब लगे कि कीट या रोग का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर को पार कर चुका है और फसल को भारी नुकसान हो रहा है । धब्बे, झुलसा, ऐन्थ्रेक्नोज़ और रस्ट रोग हेतु फफूंदनाशी मैन्कोजेब 75% WP (2 ग्राम/लीटर), क्लोरोथैलोनिल 75% WP (2 ग्राम/लीटर), या प्रोपिकोनाजोल 25% EC (1 मि.ली./लीटर) का छिडकाव करें। चूर्णिल असिता हेतु हेक्साकोनाजोल 5% EC (1 मि.ली./लीटर) या डायफेनोकोनाजोल 25% EC (0.5 मि.ली./लीटर) का छिड़काव करें। तना सड़न, विल्ट व जड़ गलन हेतु कार्बेन्डाजिम 12% + मैन्कोजेब 63% (2 ग्राम/लीटर) या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50% WP (3 ग्राम/लीटर) का घोल बनाकर पौधों की जड़ों के पास ड्रेंचिंग करें। थ्रिप्स, सफेद मक्खी और हरा तेला हेतु कीटनाशी स्पिनोसैड 45 SC (0.3 मि.ली./लीटर), थायमेथॉक्सम 25 WG (0.25 ग्राम/लीटर), फिप्रोनिल 5 SC (1.0 मि.ली./लीटर), या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 SL (0.5 मि.ली./लीटर) का छिड़काव पत्तों के पीछे तरफ भी करें। सभी प्रकार की इल्लियों और पत्ती मोड़क हेतु क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 SC (0.3 मि.ली./लीटर) या एमामेक्टिन बेंजोएट 5 SG (0.4 ग्राम/लीटर) सबसे अचूक और लंबे समय तक असर दिखाने वाली दवाएं हैं। तना मक्खी हेतु क्लोरपायरीफॉस 20 EC या प्रोफेनोफॉस 40 EC (2.0 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी) का उपयोग करें। दवाओं का छिड़काव हमेशा सुबह या शाम के ठंडे समय में ही करें जब हवा शांत हो। तेज धूप या तेज हवा में छिड़काव करने से दवा उड़ जाती है और असर नहीं करती। कीटनाशक मिलाते और छिड़कते समय हाथों में रबर के दस्ताने, मुंह पर मास्क और पूरे बदन को ढकने वाले कपड़े जरूर पहनें। छिड़काव के दौरान धूम्रपान या कुछ भी खाने-पीने से बचें। काम खत्म होने के बाद साबुन से अच्छी तरह नहाएं। कीटनाशक के खाली डिब्बों, प्लास्टिक की बोतलों को इस्तेमाल के बाद पूरी तरह कूट-तोड़कर या पिचकाकर आबादी से दूर जमीन में गहरा दबा दें। इनका उपयोग भूलकर भी घरेलू काम या पानी भरने के लिए न करें। हमेशा कीटनाशक खरीदने के बाद उसके डिब्बे पर दिए गए रंगीन सुरक्षा त्रिकोण (लाल, पीला, नीला, हरा) और सावधानियों को ध्यान से पढ़ें।निष्कर्षकिसान भाइयों, खेती में समझदारी ही सबसे बड़ा मुनाफा है। खेत का लगातार चक्कर लगाएं, रोगों और कीटों को आर्थिक क्षति स्तर पर पहचानें और उसके बाद ही रसायनों का सही मात्रा में छिड़काव करें। किसी भी आपातकालीन स्थिति या संशय में तुरंत अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से संपर्क कर सलाह लें।




