टीकमगढ़, कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी.एस. किरार, वैज्ञानिक डॉ. आर.के. प्रजापति, डॉ. एस.के. सिंह, डॉ. यु.एस. धाकड़, डॉ.एस.के. जाटव एवं डॉ. आई.डी. सिंह द्वारा मानसून के 10-12 दिन विलम्ब से आने की स्थिति में किसानों को खरीफ फसलों के विपुल उत्पादन हेतु समसामयिकी सलाह प्रिंट मीडिया के माध्यम से किसानों को दी जा रही है। हमारे जिले में खरीफ की प्रमुख फसलें उड़द, मूंगफली, तिल एवं सोयाबीन है। जिले में अभी तक 50 से 60% क्षेत्र की बुवाई हो चुकी है, शेष बुवाई का कार्य 15 जुलाई तक पूर्ण कर लेवे। अभी वर्तमान में उड़द, मूंग, सोयाबीन, तिल एवं मूंगफली की बुवाई के लिए वैज्ञानिकों द्वारा समसामयिकी सलाह प्रसारित की जा रही है। मूंग, उड़द, तिल एवं मूंगफली हल्की (रेतीली दोमट) भूमि में कम अवधि वाली किस्म की बुवाई करें और बुवाई के पूर्व फफूंदनाशक दवा कार्बोक्सिन + थायरम या कार्बेन्डाजिम + मेन्कोजेब 2 ग्राम दवा प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें। उपचार करने से प्रारंभिक अवस्था में बीजों में फफूंदजनित बीमारियों से सुरक्षित रहती हैं। बुवाई में देरी होने पर 15-20% बीज बढ़कर बुवाई करें। ढलान एवं हल्की रेतीली खेतों की मेड बनाएं जिससे वर्षा पानी का संचय किया जाए। इस वर्ष एल-निनो के प्रभाव से वर्षा अनियमित होगी इसलिए किसान भाई कतारों में सीडड्रिल या कूढ़-नाली विधि (रिज-फरौ) या बी.बी.एफ. (चौड़ी मेड नाली) से बुवाई करें, जिससे कम और अधिक वर्षा दोनों स्थिति में फसल को फायदा होगा। यदि छिड़काव विधि से वुबाई की है तब हमें जल निकास की खेत में नालियां बना देना चाहिए। बुवाई के पूर्व मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर एन.पी.के. की अनुशंसित उर्वरक की मात्रा बुवाई के समय खेत में मिला देना चाहिए। मूंगफली और सोयाबीन की फसल में सूखा की स्थिति में स्प्रिंकलर से हल्की सिंचाई की व्यबस्था होना चाहिए जिससे उत्पादन प्रभावित नहीं होगा। जो किसान घर के बीज का उपयोग करता है तो उस बीज की सफाई करें और अंकुरण क्षमता हेतु 100 दाने लेकर जांच करें। अंकुरण क्षमता 70% से अधिक होने पर अनुशंसित बीज दर डालें और अंकुरण क्षमता 60% तक है तब उस स्थिति में 15-20% बीज बढाकर बुवाई करें। यदि किसान ने कतार में बुवाई की है तो कतारो के बीच में मल्चिंग (अच्छादन) का कार्य करें, जिससे सिंचाई की बचत होगी, निंदा भी नहीं पनप पाएंगे और सूखा की स्थिति में फसल की बचत होगी।
क्र. फसल आकस्मिक कृषि कार्ययोजना
1 उड़द कम अवधि वाली किस्में – आई.पी.यू. 13-1, इंदिरा उर्द – 1, प्रताप उर्द-1, टी.जे.यू. 339
बीज की मात्रा में 20% वृद्धि, कतार की आपस की दूरी में कमी (25 से.मी.), बीजउपचार कार्बोक्सिन 37.5% और थिरम 37.5% @ 2 ग्रा. + थियामेथोक्सम 30% FS @ 1 ग्रा. + राइज़ोबियम @ 10 मि.ली./कि.ग्रा. बीज, खाद एवं उर्वरक 20:50:20 NPK बुवाई के समय आधार रूप में उपयोग
2 सोयाबीन कम अवधि वाली किस्में – जे.एस. 20-98, जे.एस. 21-72, जे.एस. 20-69, जे.एस. 24-29, जे.एस. 20-60, आर.वी.एस.एम 11-35
बीज की मात्रा में 20% वृद्धि, कतार की आपस की दूरी में कमी (30 से.मी.), बीजउपचार कार्बोक्सिन 37.5% और थिरम 37.5% @ 2 ग्रा. + थियामेथोक्सम 30% FS @ 1 ग्रा. + राइज़ोबियम @ 10 मि.ली./कि.ग्रा. बीज, खाद एवं उर्वरक 20:60:20:20 NPKS बुवाई के समय आधार रूप में उपयोग
3 मूंगफली कम अवधि वाली किस्में – के. 18-12, जी.जे.जी. 32, गिरनार 5
बीज की मात्रा में 20% वृद्धि, कतार की आपस की दूरी में कमी (30 से.मी.), बीजउपचार कार्बोक्सिन 37.5% और थिरम 37.5% @ 2 ग्रा. + थियामेथोक्सम 30% FS @ 1 ग्रा. + राइज़ोबियम @ 10 मि.ली./कि.ग्रा. बीज, खाद एवं उर्वरक 20:60:20:20 NPKS बुवाई के समय आधार रूप में उपयोग
4 तिल कम अवधि वाली किस्में – टी.के.जी. 306, टी.के.जी. 308, जी.टी. 6, जी.टी. 7
बीज की मात्रा में 20% वृद्धि, कतार की आपस की दूरी में कमी (30 से.मी.), बीजउपचार कार्बोक्सिन 37.5% और थिरम 37.5% @ 2 ग्रा. + थियामेथोक्सम 30% FS @ 1 ग्रा. + राइज़ोबियम @ 10 मि.ली./कि.ग्रा. बीज, खाद एवं उर्वरक 40:30:20:20 NPKS बुवाई के समय आधार रूप में उपयोग
5 श्री अन्न कोदो – जे.के. 48, जे.के. 137
कुटकी – जे.के. 4
रागी – जी.पी.यू. 28, जी.पी.यू. 67
हल्की भूमि में कतार से बुवाई करें
6 टमाटर सूखा, अधिक तापमान, नमी एवं पत्ती मोड़क विषाणु के प्रति सहनशील प्रजातियाँ – अर्का रक्षक, अर्का विकास, अर्का सौरभ, काशी चयन, काशी आदर्श
बीजउपचार कार्बेन्डाजिम 12% + मैन्कोज़ेब 63% WP @ 2 ग्रा. + थियामेथोक्सम 30% FS @ 1 ग्रा., पौध रोपण के समय जड़ उपचार मेटालेक्सिल 4% + मैनकोजेब 64% @ 3 ग्रा./ली., खाद एवं उर्वरक 140:80:80 NPK, टपक सिंचाई, अच्छादन एवं सहारा पद्धति
7 बैगन सूखा, अधिक तापमान एवं नमी के प्रति सहनशील प्रजातियाँ –
काशी उत्तम, काशी संदेश, काशी प्रकाश, अर्का नवनीत, काशी ब्रिंजल ग्रीन राउंड
बीजउपचार कार्बेन्डाजिम 12% + मैन्कोज़ेब 63% WP @ 2 ग्रा. + थियामेथोक्सम 30% FS @ 1 ग्रा., पौध रोपण के समय जड़ उपचार मेटालेक्सिल 4% + मैनकोजेब 64% @ 3 ग्रा./ली., खाद एवं उर्वरक 150:80:80 NPK, टपक सिंचाई एवं अच्छादन
नोट – कम वर्षा की स्थिति में टमाटर के स्थान पर बैगन एवं मिर्च लगाना अत्याधिक लाभदायक होगा
8 मिर्च सूखा, अधिक तापमान, नमी एवं पत्ती मोड़क विषाणु के प्रति सहनशील प्रजातियाँ – अर्का स्वेता, अर्का निहिरा, काशी गरिमा, काशी रत्ना, काशी आभा, काशी अनमोल
बीजउपचार कार्बेन्डाजिम 12% + मैन्कोज़ेब 63% WP @ 2 ग्रा. + थियामेथोक्सम 30% FS @ 1 ग्रा., पौध रोपण के समय जड़ उपचार मेटालेक्सिल 4% + मैनकोजेब 64% @ 3 ग्रा./ली., खाद एवं उर्वरक 150:60:60 NPK, टपक सिंचाई एवं अच्छादन
नोट – कम वर्षा की स्थिति में टमाटर के स्थान पर बैगन एवं मिर्च लगाना अत्याधिक लाभदायक होगा
9 कद्दूवर्गीय सब्जियाँ (लौकी, खीरा, कद्दू, गिल्की एवं करेला) कद्दूवर्गीय सब्जियों की पौध तैयार करने के लिए पालीथीन की छोटी-छोटी थैलियों में कम्पोस्ट खाद, मिट्टी एवं रेत को 1:1:1 में मिलाकर थैलियों में भरने के बाद इनमें बीजों की बुआई कर दें, लगभग 10-12 दिनों में पौध तैयार हो जाता है। वर्षा नहीं होने की स्थिति में पालीबेग्स में नर्सरी तैयार कर समय की बचत की जा सकती है।
मचान विधि (बावर तकनिकी) का प्रयोग करें
उन्नत एवं संकर किस्मों का चयन करें
बीजउपचार कार्बेन्डाजिम 12% + मैन्कोज़ेब 63% WP @ 2 ग्रा. + थियामेथोक्सम 30% FS @ 1 ग्रा./ली.




