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सारथी से स्वामी तक: भारत टैक्सी की सहकारी क्रांति

बलकार सिंह पूनियां
भारत के तेजी से बदलते शहरी परिदृश्य में परिवहन अब केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का साधन नहीं रह गया है। यह रोजगार, आजीविका, आर्थिक अवसर, सामाजिक समावेशन और जीवन की गुणवत्ता से सीधे जुड़ा हुआ क्षेत्र बन चुका है। उपलब्ध सामग्री के अनुसार, भारत टैक्सी की स्थापना 6 जून 2025 को बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002 के अंतर्गत आठ राष्ट्रीय स्तर की सहकारी संस्थाओं के सहयोग से हुई।
भारत टैक्सी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका सहकारी स्वामित्व मॉडल है। सामान्य प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था में ड्राइवर प्रायः सेवा देने वाला व्यक्ति होता है, जबकि प्लेटफॉर्म का स्वामित्व और निर्णय लेने की शक्ति अलग संस्था के पास रहती है। भारत टैक्सी इस संबंध को बदलने का प्रयास करती है। यहां ड्राइवर को केवल चालक नहीं, बल्कि ‘सारथी’ और सदस्य-मालिक के रूप में देखने की अवधारणा सामने आती है। जो व्यक्ति अपने श्रम, समय और सेवा से प्लेटफॉर्म का मूल्य तैयार करता है, उसे उसके स्वामित्व और निर्णय-प्रक्रिया में भागीदारी मिलनी चाहिए—यही इस मॉडल की मूल भावना है। शेयर पूंजी के माध्यम से सारथियों को सदस्य बनने और शासन में भाग लेने का अवसर तथा निदेशक मंडल में उनका प्रतिनिधित्व इस व्यवस्था को सहभागी स्वरूप प्रदान करता है।
यही वह बिंदु है जहां भारत टैक्सी केवल परिवहन सेवा नहीं रह जाती, बल्कि आर्थिक लोकतंत्र के प्रयोग के रूप में दिखाई देती है। ‘सारथी ही स्वामी’ की सोच श्रम को केवल आय अर्जित करने का माध्यम न मानकर उसे स्वामित्व से जोड़ती है। यदि प्लेटफॉर्म की सफलता में चालक की भूमिका केंद्रीय है तो उसके आर्थिक लाभ और निर्णय प्रक्रिया में उसकी हिस्सेदारी भी महत्वपूर्ण होनी चाहिए। सहकारिता का यही दर्शन भारत टैक्सी को पारंपरिक डिजिटल प्लेटफॉर्म मॉडल से अलग पहचान देता है।
इस मॉडल का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष शून्य-कमीशन और सर्ज-फ्री किराया है। उपलब्ध सामग्री के अनुसार, भारत टैक्सी पारदर्शी किराया व्यवस्था पर जोर देती है और मांग बढ़ने के समय अचानक किराया बढ़ाने की व्यवस्था से अलग मॉडल प्रस्तुत करती है। इसका उद्देश्य यात्रियों के लिए किराये में पारदर्शिता और सारथियों के लिए आर्थिक भागीदारी को मजबूत करना है। यदि तकनीकी प्लेटफॉर्म से पैदा होने वाले आर्थिक मूल्य का बड़ा हिस्सा सेवा प्रदाताओं तक पहुंचता है, तो यह डिजिटल अर्थव्यवस्था में अधिक न्यायसंगत भागीदारी की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयोग बन सकता है।
भारत टैक्सी का महत्व केवल ड्राइवरों की आर्थिक स्थिति तक सीमित नहीं है। यह समावेशी शहरी गतिशीलता की दिशा में भी संभावनाएं पैदा करता है। बाइक टैक्सी, ऑटो रिक्शा, इकोनॉमी कैब, प्रीमियम सेडान, एक्सएल कैब, किराया, आउट-स्टेशन और अनुसूचित सवारी जैसी सेवाएं अलग-अलग वर्गों और यात्रियों की आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रयास करती हैं। पारदर्शी किराया व्यवस्था यात्रियों को यात्रा से पहले संभावित खर्च समझने में सहायता करती है।
इस पहल का एक उल्लेखनीय पक्ष महिला सशक्तिकरण है। ‘सारथी दीदी’ के माध्यम से महिला यात्रियों को महिला ड्राइवर चुनने का विकल्प तथा ‘बाइक दीदी’ के माध्यम से महिलाओं की परिवहन क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया गया है। उपलब्ध सामग्री के अनुसार, फरवरी 2026 तक 150 से अधिक महिला ड्राइवर इस पहल से जुड़ चुकी थीं। यह केवल सुरक्षित यात्रा का प्रश्न नहीं है; यह महिलाओं को आर्थिक अवसर और आजीविका से जोड़ने का प्रयास भी है।
किसी भी डिजिटल परिवहन सेवा की सफलता के लिए सुरक्षा और विश्वसनीयता अत्यंत आवश्यक हैं। भारत टैक्सी के मॉडल में पहचान एवं दस्तावेजों का सत्यापन, पृष्ठभूमि की जांच, सुरक्षा प्रशिक्षण, यात्रा की सीधी निगरानी, आपातकालीन सहायता और चालक की रेटिंग जैसी व्यवस्थाओं पर जोर दिया गया है। पुलिस के साथ समन्वय और नियंत्रण कक्ष के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था आपात स्थितियों में त्वरित कार्रवाई की संभावना को भी मजबूत करती है। डिजिटल सुविधा तभी वास्तव में सार्थक मानी जा सकती है, जब उसके साथ यात्रियों की सुरक्षा, विश्वास और संतुष्टि भी सुनिश्चित हो।
भारत टैक्सी का डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से जुड़ाव भी महत्वपूर्ण है। डिजिलॉकर, उमंग और एपीआई सेतु जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्मों के साथ एकीकरण की दिशा में किए गए प्रयास कागजरहित ऑनबोर्डिंग, डिजिटल सत्यापन, सुरक्षित डेटा-साझाकरण और कैशलेस भुगतान जैसी सुविधाओं को बढ़ावा दे सकते हैं। यह इस बात का उदाहरण है कि डिजिटल तकनीक का उपयोग केवल सुविधा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों और श्रमिकों की आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए भी किया जा सकता है।
सहकारी मॉडल की वास्तविक शक्ति तब सामने आती है जब उसे सामाजिक सुरक्षा से जोड़ा जाए। भारत टैक्सी से जुड़े सारथियों को ई-श्रम पोर्टल से जोड़ने तथा उपलब्ध सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक उनकी पहुंच बढ़ाने का प्रयास इसी दिशा में महत्वपूर्ण है। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा और समूह स्वास्थ्य बीमा जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख यह संकेत देता है कि प्लेटफॉर्म आधारित कार्य को केवल दैनिक आय के संदर्भ में नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक संरक्षण के साथ देखने का प्रयास किया जा रहा है।
25 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत टैक्सी से लगभग 8 लाख पंजीकृत सारथी और लगभग 41 लाख पंजीकृत ग्राहक जुड़े थे। सेवा दिल्ली-एनसीआर, गुजरात, लखनऊ, चंडीगढ़, मुंबई, जयपुर, कानपुर और पुणे जैसे क्षेत्रों में संचालित हो रही थी तथा अन्य शहरों में विस्तार की योजना थी। 2029 तक विभिन्न शहरों में सहकारी राइड-हेलिंग सेवाओं की राष्ट्रीय उपस्थिति विकसित करने का लक्ष्य इस पहल की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।
वास्तव में, विकसित भारत 2047 का निर्माण केवल बड़े आर्थिक आंकड़ों से नहीं होगा। इसके लिए ऐसी अर्थव्यवस्था की आवश्यकता होगी जिसमें तकनीक अवसर पैदा करे, श्रमिक स्वामित्व और सम्मान प्राप्त करें, महिलाएं आर्थिक गतिविधियों में अधिक भागीदारी करें और सामाजिक सुरक्षा विकास का अभिन्न हिस्सा बने। भारत टैक्सी इसी व्यापक सोच में ‘सहकार से समृद्धि’ को शहरी परिवहन के क्षेत्र में व्यवहार में उतारने का एक महत्वपूर्ण प्रयोग बन सकती है।
अंततः, भारत टैक्सी को केवल एक नई कैब सेवा के रूप में देखना इसके व्यापक महत्व को सीमित करना होगा। यह तकनीक, सहकारिता, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण और समावेशी विकास को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास है। यदि ‘सारथी से स्वामी’ की अवधारणा व्यवहार में मजबूत होती है और सहकारी स्वामित्व तथा डिजिटल नवाचार के बीच संतुलन कायम रहता है, तो भारत टैक्सी प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था के लिए एक अधिक सहभागी और जन-केंद्रित विकल्प प्रस्तुत कर सकती है।

बलकार सिंह पूनियां
सहायक प्रोफेसर
ग्रामीण विकास , इग्नू, नई दिल्ली

सारथी से स्वामी तक: भारत टैक्सी की सहकारी क्रांति

बलकार सिंह पूनियां
भारत के तेजी से बदलते शहरी परिदृश्य में परिवहन अब केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का साधन नहीं रह गया है। यह रोजगार, आजीविका, आर्थिक अवसर, सामाजिक समावेशन और जीवन की गुणवत्ता से सीधे जुड़ा हुआ क्षेत्र बन चुका है। उपलब्ध सामग्री के अनुसार, भारत टैक्सी की स्थापना 6 जून 2025 को बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002 के अंतर्गत आठ राष्ट्रीय स्तर की सहकारी संस्थाओं के सहयोग से हुई।
भारत टैक्सी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका सहकारी स्वामित्व मॉडल है। सामान्य प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था में ड्राइवर प्रायः सेवा देने वाला व्यक्ति होता है, जबकि प्लेटफॉर्म का स्वामित्व और निर्णय लेने की शक्ति अलग संस्था के पास रहती है। भारत टैक्सी इस संबंध को बदलने का प्रयास करती है। यहां ड्राइवर को केवल चालक नहीं, बल्कि ‘सारथी’ और सदस्य-मालिक के रूप में देखने की अवधारणा सामने आती है। जो व्यक्ति अपने श्रम, समय और सेवा से प्लेटफॉर्म का मूल्य तैयार करता है, उसे उसके स्वामित्व और निर्णय-प्रक्रिया में भागीदारी मिलनी चाहिए—यही इस मॉडल की मूल भावना है। शेयर पूंजी के माध्यम से सारथियों को सदस्य बनने और शासन में भाग लेने का अवसर तथा निदेशक मंडल में उनका प्रतिनिधित्व इस व्यवस्था को सहभागी स्वरूप प्रदान करता है।
यही वह बिंदु है जहां भारत टैक्सी केवल परिवहन सेवा नहीं रह जाती, बल्कि आर्थिक लोकतंत्र के प्रयोग के रूप में दिखाई देती है। ‘सारथी ही स्वामी’ की सोच श्रम को केवल आय अर्जित करने का माध्यम न मानकर उसे स्वामित्व से जोड़ती है। यदि प्लेटफॉर्म की सफलता में चालक की भूमिका केंद्रीय है तो उसके आर्थिक लाभ और निर्णय प्रक्रिया में उसकी हिस्सेदारी भी महत्वपूर्ण होनी चाहिए। सहकारिता का यही दर्शन भारत टैक्सी को पारंपरिक डिजिटल प्लेटफॉर्म मॉडल से अलग पहचान देता है।
इस मॉडल का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष शून्य-कमीशन और सर्ज-फ्री किराया है। उपलब्ध सामग्री के अनुसार, भारत टैक्सी पारदर्शी किराया व्यवस्था पर जोर देती है और मांग बढ़ने के समय अचानक किराया बढ़ाने की व्यवस्था से अलग मॉडल प्रस्तुत करती है। इसका उद्देश्य यात्रियों के लिए किराये में पारदर्शिता और सारथियों के लिए आर्थिक भागीदारी को मजबूत करना है। यदि तकनीकी प्लेटफॉर्म से पैदा होने वाले आर्थिक मूल्य का बड़ा हिस्सा सेवा प्रदाताओं तक पहुंचता है, तो यह डिजिटल अर्थव्यवस्था में अधिक न्यायसंगत भागीदारी की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयोग बन सकता है।
भारत टैक्सी का महत्व केवल ड्राइवरों की आर्थिक स्थिति तक सीमित नहीं है। यह समावेशी शहरी गतिशीलता की दिशा में भी संभावनाएं पैदा करता है। बाइक टैक्सी, ऑटो रिक्शा, इकोनॉमी कैब, प्रीमियम सेडान, एक्सएल कैब, किराया, आउट-स्टेशन और अनुसूचित सवारी जैसी सेवाएं अलग-अलग वर्गों और यात्रियों की आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रयास करती हैं। पारदर्शी किराया व्यवस्था यात्रियों को यात्रा से पहले संभावित खर्च समझने में सहायता करती है।
इस पहल का एक उल्लेखनीय पक्ष महिला सशक्तिकरण है। ‘सारथी दीदी’ के माध्यम से महिला यात्रियों को महिला ड्राइवर चुनने का विकल्प तथा ‘बाइक दीदी’ के माध्यम से महिलाओं की परिवहन क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया गया है। उपलब्ध सामग्री के अनुसार, फरवरी 2026 तक 150 से अधिक महिला ड्राइवर इस पहल से जुड़ चुकी थीं। यह केवल सुरक्षित यात्रा का प्रश्न नहीं है; यह महिलाओं को आर्थिक अवसर और आजीविका से जोड़ने का प्रयास भी है।
किसी भी डिजिटल परिवहन सेवा की सफलता के लिए सुरक्षा और विश्वसनीयता अत्यंत आवश्यक हैं। भारत टैक्सी के मॉडल में पहचान एवं दस्तावेजों का सत्यापन, पृष्ठभूमि की जांच, सुरक्षा प्रशिक्षण, यात्रा की सीधी निगरानी, आपातकालीन सहायता और चालक की रेटिंग जैसी व्यवस्थाओं पर जोर दिया गया है। पुलिस के साथ समन्वय और नियंत्रण कक्ष के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था आपात स्थितियों में त्वरित कार्रवाई की संभावना को भी मजबूत करती है। डिजिटल सुविधा तभी वास्तव में सार्थक मानी जा सकती है, जब उसके साथ यात्रियों की सुरक्षा, विश्वास और संतुष्टि भी सुनिश्चित हो।
भारत टैक्सी का डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से जुड़ाव भी महत्वपूर्ण है। डिजिलॉकर, उमंग और एपीआई सेतु जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्मों के साथ एकीकरण की दिशा में किए गए प्रयास कागजरहित ऑनबोर्डिंग, डिजिटल सत्यापन, सुरक्षित डेटा-साझाकरण और कैशलेस भुगतान जैसी सुविधाओं को बढ़ावा दे सकते हैं। यह इस बात का उदाहरण है कि डिजिटल तकनीक का उपयोग केवल सुविधा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों और श्रमिकों की आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए भी किया जा सकता है।
सहकारी मॉडल की वास्तविक शक्ति तब सामने आती है जब उसे सामाजिक सुरक्षा से जोड़ा जाए। भारत टैक्सी से जुड़े सारथियों को ई-श्रम पोर्टल से जोड़ने तथा उपलब्ध सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक उनकी पहुंच बढ़ाने का प्रयास इसी दिशा में महत्वपूर्ण है। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा और समूह स्वास्थ्य बीमा जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख यह संकेत देता है कि प्लेटफॉर्म आधारित कार्य को केवल दैनिक आय के संदर्भ में नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक संरक्षण के साथ देखने का प्रयास किया जा रहा है।
25 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत टैक्सी से लगभग 8 लाख पंजीकृत सारथी और लगभग 41 लाख पंजीकृत ग्राहक जुड़े थे। सेवा दिल्ली-एनसीआर, गुजरात, लखनऊ, चंडीगढ़, मुंबई, जयपुर, कानपुर और पुणे जैसे क्षेत्रों में संचालित हो रही थी तथा अन्य शहरों में विस्तार की योजना थी। 2029 तक विभिन्न शहरों में सहकारी राइड-हेलिंग सेवाओं की राष्ट्रीय उपस्थिति विकसित करने का लक्ष्य इस पहल की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।
वास्तव में, विकसित भारत 2047 का निर्माण केवल बड़े आर्थिक आंकड़ों से नहीं होगा। इसके लिए ऐसी अर्थव्यवस्था की आवश्यकता होगी जिसमें तकनीक अवसर पैदा करे, श्रमिक स्वामित्व और सम्मान प्राप्त करें, महिलाएं आर्थिक गतिविधियों में अधिक भागीदारी करें और सामाजिक सुरक्षा विकास का अभिन्न हिस्सा बने। भारत टैक्सी इसी व्यापक सोच में ‘सहकार से समृद्धि’ को शहरी परिवहन के क्षेत्र में व्यवहार में उतारने का एक महत्वपूर्ण प्रयोग बन सकती है।
अंततः, भारत टैक्सी को केवल एक नई कैब सेवा के रूप में देखना इसके व्यापक महत्व को सीमित करना होगा। यह तकनीक, सहकारिता, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण और समावेशी विकास को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास है। यदि ‘सारथी से स्वामी’ की अवधारणा व्यवहार में मजबूत होती है और सहकारी स्वामित्व तथा डिजिटल नवाचार के बीच संतुलन कायम रहता है, तो भारत टैक्सी प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था के लिए एक अधिक सहभागी और जन-केंद्रित विकल्प प्रस्तुत कर सकती है।

बलकार सिंह पूनियां
सहायक प्रोफेसर
ग्रामीण विकास , इग्नू, नई दिल्ली

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