सोयाबीन मे तना मक्खी, ग्रीन सेमीलूपर का प्रकोप एवं प्रबंधन
आर.डी. बारपेटे, वैज्ञानिक, संजीव वर्मा, वैज्ञानिक
मेघा तिवारी, वैज्ञानिक, नेपाल बारस्कर, कार्यक्रम सहायक
बैतूल, खरीफ की प्रमुख तिलहनी फसल सोयाबीन मे तना मक्खी (स्टेम फलाई) एवं हरी अर्धकृण्डलक इल्ली (ग्रीन सेमीलूपर) का प्रकोप आरंभिक अवस्था है। ये दोनों कीट इस फसल को व्यापक क्षति पहुचाते है। साथ ही इन दोनो कीटो के प्रकोप को किसान आरंभिक अवस्था मे पहचान नही पाता है।
तना मक्खी-वयस्क मक्खी छोटे आकार 2 मि.मी. की चमकदार काले रंग की होती है। इसके पर श्रगिकाए तथा पंखों की षिराए हल्के भूरे रंग की होती है इसकी इल्ली हल्के सफेद पीले रंग की बेलनाकार होती है जिसकी लंबाई 2 मि.मी होती. है मेगट का अग्रभाग जिसमे मुखांग होते हैं नुकीला तथा पश्च भाग गोल या चपटा होता है शंखी तने के अंदर बनती है जिसका रंग भूरा तथा लंबाई 2-3 मि.मी होती है
इस कीट की इल्ली अवस्था ही हानिकारक होती है मादा वयस्क अपने जीवन काल में 15-65 अंडे देती है जिनसे 2-4 दिन पष्चात इल्लीयाॅ बाहर निकलती है ये नवजात इल्लीया पत्तियां एवं डठलो से तने के अंदर घुसती है और तेढी मेढी सुरंग बनाती है, प्रकोप यदि 15-20 दिन के पौधो पर हुआ तो प्रकोपित शाखा या पत्ति या कभी-कभी पूरा पौध सुख जाता हैै। पौधे जब 25-30 दिन के हो जाए तब पौधे सूखते नही है परंतु कमजोर होकर अन्य व्याधियों के लिए संवेदनशील होकर नष्ट हो जाते है या फल्लियों मे दाने नहीं भरते हैं प्रकोपित पौधे के तनो पर एक छोटा छिद्र एवं तने के अंदर सुरंग आसानी से देखे जा सकते हैं आदृ एवं गर्म मौसम में घनी फसल या खरपतवार युक्त फसलों में इस कीट का गंभीर प्रकोप होता है 50ः से ज्यादा पौधे प्रभावित होते हैं एवं 15-20ः तक उत्पादन हानि होती है
हरी अर्धकुंडलक इल्ली-यह कीट सामान्यतः सोयाबीन को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचता है परंतु यदि सोयाबीन की फसल घनी हो या ज्यादा बीजदर या कतार से कतार की दूरी 45 से.मी. से कम हो एवं खरपतवार प्रबंधन प्रभावी एवं क्रांतिक अवस्था में पहले न हो तब यह कीट भारी क्षति पहुंचाता है। कीट आरंभिक अवस्था में पत्तियों को खुरचकर उनका क्लोरोफिल खाता है मुख्य तनो पर आने वाले फूलों को भी क्षति पहुंचता है। जब तक यह कीट पत्तियों में छिद्र नहीं करें तब तक कृषक इसके प्रकोप से अनजान रहता है जबकि पत्तियों में छिद्र करने के पूर्व यह कीट कलियों एवं फूलों को खाकर ज्यादा नुकसान कर चुका होता है
प्रबंधन
सोयाबीन की फसल को उसके जीवन काल के पहले एक तिहाई कालखंड में खरपतवारो से मुक्त रखे जिससे हानिकारक कीटों के लिए अनुकूल परिस्थितियों नहीं बने खेत की मेढों को भी साफ रखें।
फसल चक्र गर्मी की जुताई संतुिलत पौध संख्या संतुलित पोषण ये बहुत प्रभावित उपाय है यथासंभव इनको अपनाए।
सुरक्षात्मक रूप से जैविक कीटनाशी (बिवेरिया बेसियाना 500 मि.ली./एकड़) या प्राकृतिक कीटनाषी (नीमास्त्र/दषपर्णी अर्क) का प्रयोग करें
रासायनिक प्रबंधन उपाय के अंतर्गत 30-35 दिन की फसल में स्पायनेटोरम 11.7 एस.सी. 450 मि.ली./हे. या नोवाल्यूरान$इण्डोक्साकार्ब 4.50 एस.सी. 850 मि.ली./हे.का प्रयोग करे।
नीमस्त्र का प्रयोग 6 लीटर प्रति एकड़ के हिसाब से 15 दिन के अंतराल पर अपनी फसल पर प्रयोग करें दषपर्णी अर्क का प्रयोग 5 लीटर/एकड 25 दिन के अंतराल पर करे।
सोयाबीन की बुवाई में नाली विधि ब्रॉडबैंड विधि या मेढ पर हाथ से बुवाई विधि से करें।




