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राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड की स्थापना होगी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गत दिवस तेलंगाना में हल्दी किसानों के कल्याण के लिए राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड की स्थापना की घोषणा की। ...
किसानों को सीखनी होगी कम पानी में फसल उगाने की तकनीकी: डॉ. एसपी सिंह
लहार (भिंड)। बदलते जलवायु परिवर्तन में खेती किसानी मैं तकनीकी को अपनाकर किसान अधिक लाभ कमा सकते हैं। कम पानी की दशा में भी ...
राजमा की खेती किसानों को कर सकती है मालामाल, जानिए कैसे करें खेती और उन्नत बीज
भारत में राजमा की डिमांड काफी ज्यादा है, जो कई व्यंजनों में इस्तेमाल होता है। भारत में सबसे ज्यादा मशहूर हिमालयन रीजन में उगने वाला राजमा है, जिसके निर्यात देशभर में किया जाता है। ऐसे में यह किसानों के लिए काफी बढ़िया खेती का विकल्प हो सकता है। राजमा एक प्रकार की दाल है, जिसमें कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं। राजमा में एंटी-ऑक्सिडेंट्स, फाइबर, आयरन, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, सोडियम और कई प्रकार के पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।
किसानों के लिए फ़ायदेमंद हो सकती है जल ब्राह्मी की खेती, जानिए इसके बारे में
भोपाल, आयुर्वेद के प्रति लोगों का रुझान पिछले कुछ सालों में काफ़ी बढ़ा है। बाज़ार में आयुर्वेदिक उत्पादों की भरमार हो गई है। आयुर्वेद ...
घाटमपुर का मॉनसून मंदिर: गुंबद से टपकने वाली बूंदे बताती है कैसा होगा मानसून?
कानपुर के घाटमपुर वाले मॉनसून मंदिर में गुंबद से टपकने वाली बूंदों ने तय कर दिया है इस बार का मानसून नॉर्मल रहेगा। इस मॉनसून मंदिर में भगवान जगन्नाथ की मूर्ति की पूजा होती है। हजारों साल पुराने इस मॉनसून मंदिर के बारे में मान्यता है कि गर्मी में जब चारों तरफ पानी का सूखा रहता है, जेठ बैसख में धरती तपा करती है उस दौरान मॉनसून से पहले इस मंदिर के गुंबद से जो बूंदे टपकती हैं उनके आकार से अंदाजा लग जाता है कि मॉनसून कैसा होगा।
आलू की सहफसली खेती से बंपर कमाई कर सकते हैं किसान, जानिए कैसे
आलू एक सदाबहार सब्जी होती है। किसान इसकी खेती काफी बड़े मात्रा में कर अच्छा मुनाफा कमाते हैं। किसान आलू के बेहतर उत्पादन के लिए सहफसली तरीके से खेती करते हैं, इससे आलू के पौधों को दूसरी फसल से सुरक्षा मिल जाती है और उनका उत्पादन भी बढ़िया हो जाता है।
किसानों को मालामाल कर सकती है पालक की खेती, जानिए उन्नत किस्म और खेती का विधि
पालक सर्दी के सीजन की अच्छी सब्जी मानी जाती है। इसमें कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हमारे शरीर के लिए लाभदायक होते हैं। बता दें कि देश के किसानों के द्वारा पालन की खेती तीनों सीजन यानी रबी, खरीफ और जायद के सीजन में की जाती है।
बुंदेलखंड में खुलेगा दुनिया का पहला ‘जल विश्वविद्यालय’
पर्यावरण वैज्ञानिक प्रो. रविकांत पाठक और उमाशंकर पांडेय के पहल पर शुरू किया जा रहा लखनउ, उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में दुनिया का पहला ...
अब ऊसर जमीन पर भी लहलहाएगी फसल, वैज्ञानिकों ने विकसित किया जैव फार्मुलेशन
लखनऊ स्थित केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) के वैज्ञानिकों ने ऊसर भूमि में सुधार के लिए एक जैव फार्मुलेशन विकसित की है, जिससे ऊसर भूमि में अच्छी पैदावार और रासायनिक उर्वरकों की जरूरत कम होगी। इस फार्मुलेशन का नाम हेलो मिक्स है, और इसमें लवण सहिष्णु जीवाणुओं का उपयोग किया जाता है, जो खेतों में उपज को बढ़ावा देते हैं और ऊसर भूमि की खेती को बेहतर बनाते हैं।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार जानिए मटर उत्पादन की उन्नत तकनीक
दलहनी सब्जियों में मटर का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है। मटर की खेती से जहां एक ओर कम समय में पैदावार प्राप्त की जा सकती है वहीं ये भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में भी सहायक है। फसल चक्र के अनुसार यदि इसकी खेती की जाए तो इससे भूमि उपजाऊ बनती है।




