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प्रदेश में नर्मदा किनारे लगाए जाएंगे ऑक्सीजन देने वाले पौधे
भोपाल, मप्र की लाइफलाइन नर्मदा नदी के कैचमेंट में सिर्फ 38 प्रतिशत ही वनक्षेत्र रह गया है। इसमें भी 20 प्रतिशत से 25 प्रतिशत ...
तकनीकी से रूबरू हों किसान – डॉ. शुक्ला
नवीनतम तकनीकी का लाभ उठाने के लिए आगे आए लहार. खेती बाड़ी में आज नित रोज नई तकनीकी आ रही हैं. कृषि विश्वविद्यालयों तथा ...
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया रबी फसलों में कैसे लें अच्छा उत्पादन
गेंहू मे यूरिया का उपयोग सिंचाई उपरान्त ही करे,
बेकार पड़ी जमीन पर भी खेती करके बढ़ा सकते हैं रोजगार-स्वरोजगार के अवसर, जानिए कैसे
डॉ. वेद प्रकाश सिंह वरिष्ठ प्रशिक्षक, सेडमैप, भोपाल भोपाल, कई बार हम बेकार पड़ी भूमि को बेकार ही पड़े रहने देते हैं और यह ...
हरा सोना की खेती में बालाघाट के आदिवासी किसानों को दिख रहा लाभ
मुख्य फसल धान के नुकसान को दूर करने बांस की खेती बेहतर अपनाई जा रही है।बैहर तहसील क्षेत्र में ऐसे कई किसान बांस की खेती से जीवन स्तर सुधारने का प्रयास कर रहे है। जिससे उनकी हालत में सुधार आएगा।
कपास उत्पादन में खरगोन के किसानों ने किये क्रांतिकारी प्रयोग, लिया दोगुना उत्पादन
खरगोन जिला मुख्यालय से मात्र 20 किमी. दूर बैजापुरा के किसानों ने ऐसे दो अनुपम और नायाब प्रयोग किये जो किसानों की माली हालत को बदलने में क्रांतिकारी प्रयोग हो सकते हैं। पहला एक ऐसी विधि जो अब तक गेंहू, सोयाबीन, सरसों आदि में बुवाई उपयोगी मानी जाती थी। लेकिन अब सघन बुवाई (एचडीपीएस उच्च घनत्व रोपण प्रणाली) का कपास बुवाई में उपयोग कर दोगुना उत्पादन लिया
आवारा गायो को पालकर भी कर सकते हैं प्राकृतिक खेती
प्राकृतिक खेती अपनाने से किसानो की खेती की लागत में कमी आएगी तथा समाज मे फैल रही प्राण घातक बीमारियों से बचा जा सकेगा । रासयनिक उर्वरको एवं कीटनाशको के प्रयोग से कैंसर जैसे प्राणघातक रोग फैलकर लोगो की जान ले रहें है। इन सब समस्याओ से बचने के लिये किसानो को प्राकृतिक खेती की दिशा में आगे बढ़ना होगा
खेती में लागत कम करने और बीमारियों से बचने के लिए प्राकृतिक खेती करें किसान: डॉ सिंह
लहार। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा प्राकृतिक खेती परियोजना अंतर्गत रौन ब्लॉक के मानगढ़ गांव में किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें केंद्र के ...
प्राकृतिक खेती पद्धति से ही सुधर सकता है मिटटी का स्वास्थ्य
मृदा में कार्बनिक कार्बन, सूक्ष्म जीवों एवं देशी केंचुओं की संख्या मंे कमी होने से मृदा स्वास्थ्य खराब हो रही है। अतः प्राकृतिक खेती पद्धति अपनाकर मृदा स्वास्थ्य सुधारा जा सकता है
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कैसे करें प्राकृतिक खेती
बैतूल, कृषि विज्ञान केन्द्र, बैतूल में आज दिनांक 12/01/2023 को प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने हेतु जिले के सभी 10 विकासखंडों के 280 कृषकों, ...




