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कृषि निदेशक, कृषि तकनीकी अनुप्रयोग अनुसंधान ने केवीके टीकमगढ में ली बैठक

कृषि विज्ञान केन्द्र, टीकमगढ़ में दिनांक 23 मई 2023 को डा. एस. आर. के. सिंह, निदेशक, कृषि तकनीकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान जोन-9, जबलपुर द्वारा  केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डा. बी. एस. किरार एवं अन्य कृषि वैज्ञानिको के साथ प्रदर्शन ईकाईयो, प्राकृतिक खेती एवं श्री अन्न फसलो को जिले में बढ़ावा देने एवं आगामी माह जून के मध्य में वृहत कृषि विज्ञान मेला का आयोजन को दृष्टिगत रखते हुयें बैठक ली गई।

इंदौर में मालवा किसान मेला-2023 का शुभारंभ, कृषि मंत्री ने कहा-उन्नत खेती और अधिक उत्पादन के लिये कृषि मेले का लाभ लें किसान

उन्नत खेती और अधिक उत्पादन के लिये तकनीकी ज्ञान से स्वयं को समृद्ध करें। उन्होंने कृषि महाविद्यालय इंदौर में बुधवार को मालवा किसान मेला-2023 का शुभारंभ किया। मंत्री श्री पटेल ने मेले में किसानों को कृषि रत्न सम्मान से सम्मानित किया और किसान मेले का अवलोकन भी किया। मेले में दर्शन सिंह चौधरी, महिपाल सिंह, अन्य जन-प्रतिनिधि और कृषक उपस्थित थे।

प्रदेश के 10 जिलों में शुरू होगे 10 गोवंश वन्य विहार, निराश्रित गायों को मिलेगा आसरा

मध्यप्रदेश में निराश्रित गायों को समुचित संरक्षण देने के लिए अब गोवंश वन्य विहार बनाए जाएंगे। गोसदन को प्रदेश सरकार फिर शुरू करने जा रही है। इनका नाम गोवंश वन्य विहार होगा। ऐसे 10 वन्य विहार शुरू किए जाएंगे। यह जंगल से जुड़ी राजस्व भूमि में होंगे, जिससे गोवंशीय पशुओं को चरने के लिए जंगल में छोड़ा जा सके। एक वन्य विहार में पांच हजार से अधिक गोवंशीय पशुओं को रखने की व्यवस्था होगी।

वैज्ञानिकों का कमाल, विकसित किया ऐसा पेड़, जिसमें होंगे 12 किस्म के आम

एक वैज्ञानिक ने बताया कि आम के एक ही पेड़ पर एक दर्जन प्रजातियों के फल उगाने की यह तकनीक ग्राफ्टिंग के जरिए काफी पहले विकसित कर ली गई है, लेकिन अब पहली बार किसानों को इस तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके बाद किसानों को इसके लिए पौधे भी उपलब्ध कराए जाएंगे और खेती के दौरान उन्हें तकनीकी मदद भी दी जाएगी।

किसानों के लिए फायदेमंद हो सकती है मटर की नई किस्म ‘काशी पूर्वी’, जानें इसकी खासियत

वाराणसी, मटर की खेती करने वाले किसानों के लिए खुशखबरी है। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) ने मटर की एक ऐसी किस्म को विकसित ...

अधिक उत्पादन के लिए उन्नत बीजों का चयन जरूरी, जानिए क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक

कृषि विज्ञान केंद्र, टीकमगढ़ के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ बी.एस. किरार साथ ही केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. सुनील कुमार जाटव, डॉ. आर के प्रजापति, डॉ. आई.डी. सिंह एवं जयपाल छिगारहा द्वारा किसानों को बताया गया कि खरीफ में फसलों के अधिक उत्पादन हेतु उन्नत किस्मों के चयन एवं व्यवस्था बुबाई से 15 से 20 दिन पूर्व कर लेना चाहिए अधिकांशत: किसान मानसून आने पर खरीफ की बुवाई शुरू होने पर बीज की व्यवस्था करने के लिए किसान दौड़-धूप करता है उस समय तत्काल अच्छा बीज उपलब्ध नहीं हो पाता है और मिलता भी है तो महंगा मिलता है I

विश्व मधुमक्खी दिवस पर मधुमक्खियों‌ के महत्व पर हुई चर्चा

आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र कोटवा पर विश्व मधुमक्खी दिवस के अवसर पर मधुमक्खी पालकों, किसानों एवं कृषि छात्रों से चर्चा की गई। मीठी क्रांति के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु आवश्यक जानकारी व मधुमक्खियों के पर्यावरण संरक्षण और खाद्य सुरक्षा में योगदान के बारे में विस्तार से बताया गया। पूर्वी उत्तर प्रदेश में मधुमक्खी पालन के लिए माह मई से लेकर सितम्बर तक का समय मुश्किलों से भरा होता है।

कृषि के अधो-संरचनात्मक विकास पर दिया जा रहा है जोर: नरेन्द्र सिंह 

देश में कृषि के अधो-संरचनात्मक विकास पर निरंतर काम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों को मुनाफे की खेती कर आत्म-निर्भर बनाने के लिये केन्द्र सरकार विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। केन्द्रीय कृषि एवं किसान-कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने यह बात विश्व मधुमक्खी दिवस पर बालाघाट में हुई राष्ट्रीय कार्यशाला में कही।

विश्व मधुमक्खी दिवस पर मधुमक्खी पालन एवं प्रबंधन पर छात्रों को प्रशिक्षित किया 

कृषि विज्ञान केंद्र, रीवा, म प्र के प्रमुख डा ए के पांडेय के निर्देशन में केंद्र में विश्व मधुमक्खी दिवस का आयोजन किया गया, जिसमे शहीद मेजर आशीष दुबे शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (सी एम राइज), मनगवा रीवा म प्र के छात्र छात्राओं ने व्यवसायिक प्रशिक्षक आदर्श पटेल एवम प्रियव्रतनाथ तिवारी के साथ भाग लिया।

कृषि वैज्ञानिकों ने बताया गन्ने को कंडुआ रोग से कैसे बचाएं

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, नानपारा, बहराइच-।। के वैज्ञानिकों ने कृषकों के प्रक्षेत्र पर गन्ने में आ रही समस्या का निदान किया। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. के. एम. सिंह ने बताया कि पेड़ी गन्ने में हो रहा कंडुआ रोग कैंसर के समान है। अगर समय से इसकी रोकथाम नहीं की गई तो यह हवा के साथ अन्य पौधों में भी फैल जाता है। जिससे अगली पीढ़ी की फसल भी बर्बाद होने की आंशका होती है।