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फसलों का कीटों से बचाव हेतु बेहतर विकल्प है जैव रसायन

मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और कीटों, बीमारियों से पौधों को होने वाले नुकसान से बचाने का एकमात्र तत्काल व प्रभावी उपाय केवल रासायनिक खाद और दवाएं है, लेकिन इन जहरीले रसायनों का प्रभाव से फसल को मिलने वाली राहत से कहीं अधिक नुकसान हो रहा है। क्योंकि केवल लाभ पाने की लालसा से संतुलित रासायनिक खादों व कीटनाशकों की संस्तुत मात्रा का प्रयोग न करके अविवेक पूर्ण तरीके से किया जा रहा है। जिससे मिट्टी और उपज की गुणवत्ता के साथ ही पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।

फलों के फटने का कारण एवं निदान, जानिए डॉ कुकसाल से

फलों का फटना एक गंभीर व सामान्य समस्या है। फलों का फटना, फलों की गुणवत्ता को कम करने के साथ ही उनमें रोग व कीट आक्रमण की संभावना को भी बढ़ा देता है। आम, लीची, अनार, अंगूर, सेब, चेरी, नीम्बू आदि फलों में फल फटने की समस्या अधिक देखने को मिलती है।  फल फटने के कई कारण हो सकते हैं

किसानों को मालामाल कर सकती है धान की नई प्रजाति मालवीय मनीला

वाराणसी के इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट और काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सहयोग से विकसित धान की नई किस्म को पूरे भारत में लॉन्च कर दिया गया है। इस धान के बीज को तैयार करने में बीएचयू के वैज्ञानिकों को 15 साल लगा है।

किसानों के लिए लाभकारी हो सकती है बेल की बागवानी: प्रो डी के सिंह

डॉ शशिकान्त सिंहकृषि संवाददाता आजमगढ़। बेल एक ऐसा फल है जो अपने में लाखों फायदे छुपाए हुए है। बेल का सभी भाग छाल, पत्ती और ...

कृषि वैज्ञानिकों की देखरेख में फसलों पर ड्रोन से किया गया जवाहर दवा का निःशुल्क छिड़काव

छतरपुर। कृषि विज्ञान केंद्र नौगांव जिला छतरपुर में डॉ. राजीव कुमार सिंह (वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख), डॉ. कमलेश अहिरवार (वैज्ञानिक उद्यानिकी) एवं हेमन्त सिन्हा ...

सोलर पावर ट्री, बिजली का सस्ता एवं बेहतर विकल्प

डॉ शशिकान्त सिंहकृषि संवाददातासमस्तीपुर। डॉ राजेंद्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने विश्वविद्यालय में योगदान देने के साथ ...

कृषि विज्ञान केंद्र में “माँ है तो फिकर नहीं””कार्यक्रम का हुआ आयोजन

डॉ शशिकान्त सिंहआजमगढ़। कृषि विज्ञान केन्द्र कोटवा आजमगढ़ और विरबैक कम्पनी के संयुक्त तत्वावधान में आज केन्द्र के समीप के गाँव कोटवा की पूर्व ...

काले मोतियों की उजली कहानी, बस्तर के जंगलों की जुबानी

लगभग 25 साल पहले यहाँ के एक प्रगतिशील किसान वैज्ञानिक डॉ राजाराम त्रिपाठी ने खेती के जो जैविक एवं हर्बल खेती के जो नए नए प्रयोग शुरू किये थे। उनमें सबसे प्रमुख सपना था छत्तीसगढ़ के लिए काली-मिर्च की नई प्रजाति का विकास तथा उसे छत्तीसगढ़ के किसानों के खेतों पर और जंगलों में सफल करके दिखाना।

विश्व मधुमक्खी दिवस पर बालाघाट में राष्ट्रीय शहद एक्स-पो 20 मई को

विश्व मधुमक्खी दिवस- 20 मई को बालाघाट में राष्ट्रीय शहद एक्स-पो होगा। साथ ही 18 से 20 मई तक राज्य स्तरीय कृषि सम्मेलन होगा और कृषि प्रदर्शनी लगाई जाएगी। राष्ट्रीय बैलजोड़ी दौड़ (पट) प्रतियोगिता भी होगी। 

8 से 19 मई तक होगा MSP पर मूंग-उड़द खरीदी का पंजीयन

भोपाल, किसान-कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री कमल पटेल ने कहा है कि प्रदेश में विपणन वर्ष 2023-24 में मूंग और उड़द की समर्थन मूल्य ...